अवमानना कार्यवाही में बाद की परिस्थितियों का सहारा लेकर रिट कोर्ट के आदेश से बचा नहीं जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना कार्यवाही के दौरान बाद में उत्पन्न हुई परिस्थितियों का हवाला देकर रिट कोर्ट के आदेश के पालन से बचा नहीं जा सकता। अदालत ने सड़क निर्माण के एक ठेके से जुड़े निविदा विवाद में रिट कोर्ट के आदेश का पालन न करने पर राज्य के अधिकारियों को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया।
जस्टिस राकेश थपलियाल ने कहा कि अवमानना की सुनवाई कर रही अदालत रिट कोर्ट के आदेश की वैधता या उसके गुण-दोष पर विचार नहीं कर सकती। यदि आदेश का पालन करना असंभव हो गया हो, तो संबंधित पक्ष को उसकी वैधता को उच्च अदालत में चुनौती देनी चाहिए, न कि उसका पालन करने से बचना चाहिए।
मामले में याचिकाकर्ता ने राज्य सरकार की सड़क निर्माण संबंधी निविदा प्रक्रिया में भाग लिया था, लेकिन तकनीकी मूल्यांकन के दौरान उसे अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। करीब डेढ़ वर्ष तक मामला लंबित रहने के दौरान पूरी निविदा प्रक्रिया स्थगित रही। बाद में 26 फरवरी 2026 को रिट कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को अवैध रूप से अयोग्य घोषित किया गया था और उसके वित्तीय प्रस्ताव को शामिल कर कानून के अनुसार आगे की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि आदेश के बावजूद अधिकारियों ने वित्तीय प्रस्ताव खोलने के बजाय यह कहकर पूरी प्रक्रिया फिर से रोक दी कि अन्य बोलीदाता अपनी बोली की वैधता अवधि बढ़ाने को तैयार नहीं हैं।
हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करने से इनकार करते हुए कहा कि यदि ऐसी दलील मान ली जाए, तो इससे रिट कोर्ट के आदेश और अवमानना कार्यवाही, दोनों निष्प्रभावी हो जाएंगे।
कोर्ट ने कहा,
"यदि प्रतिवादियों की यह दलील स्वीकार कर ली जाए कि बाद में उत्पन्न परिस्थितियों के कारण अब आदेश का पालन आवश्यक नहीं है, तो यह रिट कोर्ट के आदेश और अवमानना कार्यवाही, दोनों को विफल करने जैसा होगा। यदि आदेश का पालन वास्तव में असंभव हो गया था, तो उसकी वैधता को उच्च अदालत में चुनौती दी जानी चाहिए थी।"
अदालत ने यह भी कहा कि अन्य बोलीदाताओं द्वारा बोली की वैधता अवधि नहीं बढ़ाने का आधार बनाकर वित्तीय प्रस्ताव न खोलना बाद में गढ़ी गई स्थिति प्रतीत होती है। इससे ऐसा लगता है कि अधिकारियों ने किसी अनुचित उद्देश्य से रिट कोर्ट के आदेश को दरकिनार करने का प्रयास किया।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को रिट कोर्ट के 26 फरवरी 2026 के आदेश का 10 दिनों के भीतर कड़ाई से पालन करने और अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित अवधि में आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर अदालत की अवमानना अधिनियम के तहत सजा का सामना करना होगा।