UAPA-NDPS मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष अदालतें स्थापित हों: सुप्रीम कोर्ट

Update: 2026-05-09 11:42 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने UAPA, NDPS जैसे विशेष कानूनों के तहत लंबित मामलों के समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्यों को विशेष अदालतें स्थापित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि NIA Act की धारा 11 के तहत विशेष अदालतें बनाई जाएं, जहां केवल ऐसे मामलों की सुनवाई हो और कोई अन्य मुकदमा न सौंपा जाए।

चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें विशेष कानूनों के तहत मामलों के लिए एक्सक्लूसिव कोर्ट स्थापित करने का मुद्दा उठाया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि किसी हाईकोर्ट के अधीन 10 लंबित ट्रायल हों तो कम से कम 1 विशेष अदालत बनाई जाए। 15 से अधिक लंबित ट्रायल होने पर 2 अदालतें और 25 से अधिक मामलों पर 3 विशेष अदालतें स्थापित की जाएं। अदालत ने कहा कि broadly 10-15 लंबित मामलों पर एक विशेष अदालत होनी चाहिए और इन्हें एक महीने के भीतर स्थापित किया जाए।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इन अदालतों में लंबित मामलों की सुनवाई दिन-प्रतिदिन के आधार पर होगी और पीठासीन अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि कम से कम एक ट्रायल हर महीने पूरा हो।

सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि जिन 17 राज्यों को पहले नोटिस जारी किया गया था, उनमें से 5 राज्यों में अब विशेष अदालतें कार्यरत हैं। दिल्ली में भी विशेष NIA अदालत इस सप्ताह से काम शुरू कर देगी।

अदालत ने NIA को निर्देश दिया कि वह संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों से संपर्क करे। मुख्य न्यायाधीश राज्य सरकारों से परामर्श कर इन अदालतों के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध कराएं।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से यह भी कहा कि वे राज्य एजेंसियों द्वारा चलाए जा रहे मामलों के लंबित ट्रायल का विवरण हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के परामर्श से प्रस्तुत करें।

NDPS मामलों को लेकर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय ने अदालत को बताया कि ऐसे मामलों के लिए विशेष अदालतें स्थापित करने पर सक्रिय रूप से विचार चल रहा है और इसमें पर्याप्त प्रगति हुई है। इस पर CJI सूर्यकांत ने सुझाव दिया कि NDPS मामलों में विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए।

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