SC/ST महिला से छेड़छाड़ की शिकायत पर FIR दर्ज न करने पर सुप्रीम कोर्ट ने एर्नाकुलम ACP को तलब किया

Update: 2026-05-12 07:58 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने केरल पुलिस द्वारा अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) वर्ग की महिला से कथित छेड़छाड़ की शिकायत पर कार्रवाई न किए जाने को गंभीरता से लेते हुए एर्नाकुलम के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ एक आरोपी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें केरल हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत देने से इनकार किए जाने को चुनौती दी गई थी। मामला पनंगाड पुलिस स्टेशन में दर्ज कथित मारपीट और आपराधिक अतिक्रमण से जुड़ा है।

दरअसल, 11 फरवरी 2026 को केरल हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई करते हुए कुछ आरोपियों को राहत दी थी, लेकिन आरोपी नंबर 1 से 3 और 5 को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि FIR में उनके खिलाफ आपराधिक अतिक्रमण और हथियार से हमला करने जैसे स्पष्ट आरोप लगाए गए हैं।

सुनवाई के दौरान आरोपी नंबर 4, जो एक महिला है, की ओर से यह भी कहा गया था कि उसके साथ स्वयं छेड़छाड़ की गई थी। हाईकोर्ट ने इस दलील को रिकॉर्ड पर लेते हुए उसे अग्रिम जमानत दी थी।

मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज होने से पहले ही सह-आरोपी पक्ष की एक महिला ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसके साथ छेड़छाड़ हुई है। शिकायत के साथ मेडिकल रिकॉर्ड भी लगाए गए थे, जिनमें चोटों का उल्लेख था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस ने FIR तक दर्ज नहीं की।

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस की इस निष्क्रियता पर गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि जब कोई व्यक्ति प्रारंभिक साक्ष्यों के साथ पुलिस के पास शिकायत लेकर जाता है और पुलिस FIR दर्ज करने जैसी बुनियादी कार्रवाई भी नहीं करती, तो इससे आम जनता का आपराधिक न्याय प्रणाली और पुलिस व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित होता है।

कोर्ट ने यह भी नाराजगी जताई कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल जवाबी हलफनामे में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि शिकायत मिलने के बावजूद FIR क्यों दर्ज नहीं की गई। अदालत ने कहा कि यह स्वीकार तथ्य है कि शिकायत डाक के जरिए 8 जनवरी 2026 को एर्नाकुलम ACP को प्राप्त हो गई थी।

इन परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट ने एर्नाकुलम ACP को 15 मई 2026 को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होकर यह बताने का निर्देश दिया कि शिकायत मिलने के बावजूद औपचारिक FIR क्यों दर्ज नहीं की गई

Tags:    

Similar News