जेलों की निगरानी के लिए हर जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' गठित करें: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश

Update: 2026-07-31 09:46 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे मॉडल प्रिजन मैनुअल, 2016 के अनुसार प्रत्येक जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' (BoV) का गठन करें, जिसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Principal District Judge) करेंगे।

जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ जेलों में जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव से जुड़े स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई कर रही थी, जो सुकन्या शांता फैसले के अनुपालन से संबंधित है।

सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी सीनियर एडवोकेट डॉ. एस. मुरलीधर ने अदालत को बताया कि अब तक किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश ने जिला स्तर पर बोर्ड ऑफ विजिटर्स का गठन नहीं किया है। उन्होंने कहा कि मॉडल प्रिजन मैनुअल के तहत यह बोर्ड जेलों की बाहरी निगरानी का प्रमुख तंत्र है और सुप्रीम कोर्ट ने सुकन्या शांता फैसले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) के साथ मिलकर नियमित जेल निरीक्षण करने का निर्देश दिया था।

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को प्रत्येक जिले में BoV गठित करने और उसकी अध्यक्षता प्रधान जिला न्यायाधीश को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से भी कहा कि वह सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक अदालत के निर्देश पहुंचाना सुनिश्चित करें।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से जेल नियमों में आपत्तिजनक प्रावधानों में संशोधन की स्थिति रिपोर्ट भी मांगी और मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 को निर्धारित करते हुए निर्देश दिया कि सभी राज्य 3 सितंबर 2026 तक अपनी अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करें।

Tags:    

Similar News