BNSS और BSA में बदलाव के मद्देनज़र आपराधिक प्रैक्टिस नियमों में संशोधन की मांग: एमिक्स क्यूरी ने सुप्रीम कोर्ट से की अपील

Update: 2026-02-23 07:19 GMT

लंबित स्वतः संज्ञान मामले में, जो आपराधिक मुकदमों में कमियों और खामियों से संबंधित है, सुप्रीम कोर्ट अमिकस क्यूरी सिधार्थ लूथरा द्वारा दाखिल एक विस्तृत संकलन पर विचार करने जा रहा है। इसमें 2021 के ढांचे के स्थान पर संशोधित ड्राफ्ट रूल्स ऑफ क्रिमिनल प्रैक्टिस, 2026 को अपनाने का अनुरोध किया गया है।

यह सुओ मोटू मामला — “In Re: To Issue Certain Guidelines Regarding Inadequacies and Deficiencies in Criminal Trials” — 2021 के उस निर्णय से उत्पन्न हुआ था, जिसमें कोर्ट ने आपराधिक प्रक्रिया के लिए एकरूप ड्राफ्ट नियम तैयार कर राज्यों और हाई कोर्ट्स को छह माह के भीतर उन्हें लागू करने का निर्देश दिया था।

हालांकि, नए आपराधिक कानून — भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA), 2023 — लागू होने के बाद अमिकस ने तर्क दिया है कि 2021 के नियमों को नई प्रक्रिया, डिजिटल साक्ष्य और तकनीक-आधारित प्रावधानों के अनुरूप संशोधित करना आवश्यक है, ताकि किसी प्रकार का टकराव न हो और कानूनी संगति बनी रहे।

पृष्ठभूमि

अप्रैल 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने जांच, आरोप निर्धारण, ट्रायल प्रक्रिया, साक्ष्य चिह्नीकरण और निर्णय लेखन में मौजूद प्रणालीगत कमियों को दूर करने के लिए एक समान ड्राफ्ट नियम बनाए थे। साथ ही पुलिस मैनुअल और हाई कोर्ट नियमों में आवश्यक संशोधन करने को भी कहा था। मार्च 2022 में राज्यों और रजिस्ट्रार जनरलों को कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया गया था।

लेकिन BNSS और BSA लागू होने के बाद, जिनमें ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन और समयबद्ध प्रक्रियाओं को औपचारिक रूप से शामिल किया गया है, अमिकस के अनुसार 2021 के नियमों में संरचनात्मक संशोधन आवश्यक हो गया है।

अमिकस ने प्रार्थना की है कि संशोधित नियमों को अनुच्छेद 142 के तहत बाध्यकारी दिशा-निर्देश के रूप में माना जाए, जब तक कि हाई कोर्ट्स उन्हें औपचारिक रूप से न अपना लें।

जांच और ट्रायल से संबंधित प्रमुख प्रस्ताव

1. अनिवार्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग

संशोधित ड्राफ्ट में BNSS के तहत निम्न प्रक्रियाओं की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग पर जोर दिया गया है—

अपराध स्थल की जांच (धारा 176 BNSS)

तलाशी और जब्ती (धारा 105 BNSS)

बयान (धारा 180 और 183 BNSS)

ट्रायल के दौरान साक्ष्य

गृह मंत्रालय ने इसके लिए विस्तृत एसओपी जारी की है, जिसमें हैश वैल्यू, दोहरी प्रमाणन (BSA धारा 63(4)), चेन ऑफ कस्टडी, सुरक्षित भंडारण और डिजिटल साक्ष्य की सुरक्षा शामिल है। अमिकस ने सभी राज्यों में समान एसओपी लागू करने की मांग की है।

2. इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के लिए दोहरी प्रमाणन

BSA के तहत धारा 63(4) में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के लिए दो भागों में प्रमाणन आवश्यक है—

भाग A: ऑपरेटर या प्रभारी अधिकारी द्वारा

भाग B: नामित विशेषज्ञ द्वारा

इस व्यवस्था को लागू करने के लिए राज्यों से विशेषज्ञों की अधिसूचना जारी करने का आग्रह किया गया है।

3. आरोप निर्धारण की समय सीमा

BNSS की धाराओं 251(1)(b) और 263 के अनुसार पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय करना अनिवार्य है। यह समय सीमा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष अदालतों पर भी लागू होगी।

4. साक्ष्य रिकॉर्डिंग का मानकीकरण

गवाह के बयान अनुच्छेद क्रमांकित हों

प्रत्येक प्रदर्श (Exhibit) संबंधित गवाह से जुड़ा हो

धारा 161 या 164 के पूरे बयान को एक साथ प्रदर्शित करने से बचा जाए

जहां संभव हो, साक्ष्य AV प्रारूप में रिकॉर्ड किया जाए

निर्णयों में भी निम्न शामिल होना चाहिए—

विचारणीय बिंदु

निष्कर्ष

कारण

गवाहों और प्रदर्शों की सूची सहित परिशिष्ट

जमानत और विचाराधीन कैदियों के मुद्दे

अमिकस ने जमानत याचिकाओं के त्वरित निस्तारण का प्रस्ताव रखा है—

गैर-जमानती अपराधों में जमानत आवेदन 3 से 7 दिनों में निपटाए जाएं

पांच वर्ष से अधिक समय से जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को प्राथमिकता

संभावित सजा से अधिक हिरासत होने पर निजी मुचलके पर रिहाई

इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के Satender Kumar Antil और Hussain मामलों का हवाला दिया गया है।

गवाह संरक्षण

धारा 398 BNSS के तहत गवाह संरक्षण योजना लागू करने में राज्यों के बीच असमानता पाई गई है। कुछ राज्यों ने योजना अधिसूचित कर दी है, जबकि कई बड़े राज्य — जैसे तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि — अब तक ऐसा नहीं कर पाए हैं। अमिकस ने इस संबंध में स्थिति रिपोर्ट और समयसीमा मांगी है।

ई-ट्रू कॉपी नियम

दिल्ली हाई कोर्ट के 2024 के ई-ट्रू कॉपी नियमों को मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिनमें—

ऑनलाइन आवेदन

प्रमाणित डिजिटल प्रतियां

सीमित शर्तों के साथ बाहरी व्यक्तियों की पहुंच

आईटी अधिनियम के अनुरूप प्रमाणीकरण

शामिल हैं। अमिकस ने पूरे देश में ऐसे नियम लागू करने की सिफारिश की है।

केंद्र स्तर पर मांगे गए निर्देश

सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि—

विधि मंत्रालय से ई-कोर्ट सेवाओं के लिए राष्ट्रीय रोडमैप मांगा जाए

गृह मंत्रालय और आईटी मंत्रालय से डिजिटल साक्ष्य मानकों पर रिपोर्ट ली जाए

न्यायिक प्रशिक्षण संस्थानों से BNSS के तहत प्रशिक्षण की स्थिति पूछी जाए

अदालतों और जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का डेटा एकत्र किया जाए

अभियोजन और जांच का पृथक्करण

BNSS की धाराओं 18 से 20 के तहत जांच एजेंसियों और अभियोजन तंत्र को अलग करने के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई है।

प्रोबेशन संबंधी निर्देश

यदि किसी मामले में BNSS की धारा 401 या प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत प्रोबेशन नहीं दिया जाता, तो अदालतों को इसके कारण लिखित रूप में दर्ज करने होंगे।

इस प्रकार, संशोधित ड्राफ्ट नियमों का उद्देश्य नए आपराधिक कानूनों के अनुरूप एक तकनीक-सक्षम, समयबद्ध और अधिक पारदर्शी आपराधिक न्याय प्रणाली स्थापित करना है।

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