“आपकी PIL से क्या फायदा हुआ?” : सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश की मांग करने वाली NGO से पूछा
Indian Young Lawyers' Association द्वारा दायर सबरीमाला याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की पीठ ने कड़ी टिप्पणियां कीं। यह मामला सबरीमाला मंदिर में 10–50 वर्ष की महिलाओं के प्रवेश से जुड़ा है।
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि एक संगठन पूजा के अधिकार का दावा कैसे कर सकता है और यह PIL क्यों दायर की गई। जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने कहा कि गैर-आस्थावानों द्वारा धार्मिक परंपराओं को चुनौती देना गंभीर मुद्दा है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल अखबारों की खबरों के आधार पर दायर याचिका को शुरू में ही खारिज किया जा सकता था। जस्टिस सुंदरश ने इसे “कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग” बताया, जब याचिका दाखिल करने के लिए संगठन के किसी प्रस्ताव (resolution) की जानकारी नहीं दी गई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि प्रतिबंध महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है और Articles 25 and 26 of Indian Constitution के तहत धार्मिक स्थलों में प्रवेश का अधिकार शामिल है।
यह मामला Sabarimala Temple Entry Case से जुड़ा है, जिसमें 2018 में महिलाओं के प्रवेश पर रोक हटाई गई थी। अब 9-न्यायाधीशों की पीठ व्यापक संवैधानिक सवालों पर विचार कर रही है।