पश्चिम एशिया के निजी विद्यार्थियों के परिणाम पर नई नीति बना रहा केंद्र, सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

Update: 2026-06-12 08:40 GMT

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि पश्चिम एशिया के उन निजी विद्यार्थियों के लिए एक नीति तैयार की जा रही है, जिनके कक्षा 12 के परिणाम अब तक घोषित नहीं किए जा सके हैं। क्षेत्र में युद्ध और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों के कारण परीक्षाएं प्रभावित हुई थीं।

मामला सऊदी अरब में रहने वाले एक भारतीय छात्र द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है जिसमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को उसका कक्षा 12 सुधार परीक्षा परिणाम घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई।

इस मामले की अगली सुनवाई अगले शुक्रवार को होगी।

छात्र प्रांसु जिगरकुमार पटेल ने याचिका में कहा कि पश्चिम एशिया के कई देशों में परीक्षाएं रद्द होने के बाद CBSE ने विशेष मूल्यांकन योजना बनाई थी, लेकिन इसके बावजूद उसका परिणाम घोषित नहीं किया गया। 13 मई 2026 को घोषित परिणाम में उसकी स्थिति "परिणाम बाद में" दिखाई गई।

जस्टिस ए.जी. मसीह और जस्टिस विजय बिश्नोई की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला केवल एक छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि समान परिस्थितियों वाले कई विद्यार्थियों को प्रभावित करता है।

उन्होंने कहा,

"यह व्यापक मुद्दा है। सरकार ऐसे सभी विद्यार्थियों के लिए एक नीति बनाने पर विचार कर रही है।"

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित की।

याचिका के अनुसार छात्र ने वर्ष 2026 में सऊदी अरब के अल जुबैल केंद्र से निजी अभ्यर्थी के रूप में कक्षा 12 सुधार परीक्षा दी थी। उसने भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और संगणक विज्ञान विषयों में सुधार परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था।

हालांकि क्षेत्र में युद्ध जैसी परिस्थितियों और सुरक्षा चिंताओं के कारण CBSE ने बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में कई परीक्षाएं रद्द कर दी थीं। छात्र केवल भौतिकी और रसायन विज्ञान की परीक्षा दे सका, जबकि गणित, अंग्रेजी और संगणक विज्ञान की परीक्षाएं नहीं हो सकीं।

इसके बाद CBSE ने 27 मार्च 2026 को पश्चिम एशियाई देशों के विद्यार्थियों के लिए विशेष मूल्यांकन योजना जारी की थी। इस योजना के तहत जिन विषयों की परीक्षाएं नहीं हो सकीं, उनके लिए विद्यालयों के त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और पूर्व-बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर परिणाम तैयार किया जाना था।

याचिकाकर्ता का कहना है कि वह अल जुबैल स्थित भारतीय विद्यालय का छात्र रहा है और उसके सभी शैक्षणिक अभिलेख विद्यालय के पास उपलब्ध हैं, जिनका उपयोग मूल्यांकन के लिए किया जा सकता है।

याचिका में कहा गया कि परिणाम घोषित नहीं होने के कारण उसकी उच्च शिक्षा की योजनाएं प्रभावित हुई हैं। उसने एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय में बी.टेक (संगणक विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन किया, जहां उसे 1 जून 2026 तक कक्षा 12 का परिणाम प्रस्तुत करना था।

छात्र ने आरोप लगाया कि विशेष मूल्यांकन योजना के बावजूद उसका परिणाम जारी न करना मनमाना, अनुचित और भेदभावपूर्ण है तथा संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।

याचिका में कहा गया,

"परीक्षाएं युद्ध जैसी परिस्थितियों के कारण रद्द हुईं, जो छात्र के नियंत्रण से बाहर थीं। ऐसी स्थिति में उसे नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता।"

छात्र ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि CBSE को विशेष मूल्यांकन योजना लागू कर उसका परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया जाए।

वैकल्पिक रूप से गणित, अंग्रेजी और संगणक विज्ञान विषयों की विशेष परीक्षा आयोजित कराने का आदेश देने की भी मांग की गई।

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