NDPS Act| सुप्रीम कोर्ट ने ड्रग मामलों में विदेशी नागरिकों की ज़मानत के लिए फ़र्ज़ी ज़मानतदारों पर रोक लगाने के निर्देश जारी किए
सुप्रीम कोर्ट ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 (NDPS Act) के तहत कमर्शियल मात्रा में नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों में आरोपी विदेशी नागरिकों को ज़मानत देने के संबंध में निर्देश जारी किए।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने नाइजीरियाई नागरिक चिडिबेरे किंग्सले नवाचारा की ज़मानत रद्द करते हुए ये निर्देश जारी किए। नवाचारा पर लगभग 5 किलोग्राम हेरोइन से जुड़े एक मामले में आरोप था।
यह मामला तब और महत्वपूर्ण हो गया, जब कोर्ट को पता चला कि नवाचारा के लिए दी गई ज़मानत फ़र्ज़ी लग रही थी। जांच में पाया गया कि ज़मानतदार द्वारा दिया गया पता मौजूद ही नहीं था, जिस नियोक्ता (Employer) का नाम बताया गया, उसने उसे काम पर रखने से इनकार कर दिया और ज़मानत बॉन्ड में दी गई बैंक खाते की जानकारी की पुष्टि नहीं हो सकी।
कोर्ट को यह भी बताया गया कि नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो द्वारा जांचे गए कम से कम 38 मामलों और डायरेक्टरेट ऑफ़ रेवेन्यू इंटेलिजेंस द्वारा जांचे गए नौ मामलों में विदेशी नागरिक (खासकर नाइजीरिया और नेपाल से) संदिग्ध फ़र्ज़ी ज़मानतदार पेश करने के बाद भाग गए।
इस स्थिति को देखते हुए कोर्ट ने ज़मानत-ज़मानतदार प्रणाली के कामकाज की व्यापक समीक्षा की। कोर्ट ने पाया कि कुछ राज्यों में किसी और के नाम पर ज़मानत लेने (Impersonation) और फ़र्ज़ी ज़मानतदारों की समस्या बड़े पैमाने पर है और कहा कि इस मुद्दे की व्यापक जांच की ज़रूरत है।
कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया, क्योंकि उसे लगा कि ज़मानतदारों की पुष्टि की मौजूदा प्रक्रियाओं में एकरूपता की कमी थी और वे इस मामले में विफल रही थीं।
कोर्ट ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए –
1. विदेशी नागरिक का पासपोर्ट संबंधित अधिकार क्षेत्र वाली कोर्ट में जमा किया जाना चाहिए। कोर्ट आरोपी को उसकी पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर यात्रा करने से भी रोक सकती है।
2. ज़मानत पर रिहा हुए विदेशी नागरिक को रिहाई के एक सप्ताह के भीतर फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) में पंजीकरण कराना होगा। आरोपी को जांच अधिकारी और संबंधित कोर्ट को लिखित रूप में सूचित करना होगा कि पंजीकरण पूरा हो गया। कोर्ट ने FRRO को संबंधित सरकारी विभागों के साथ परामर्श करके इस पंजीकरण प्रक्रिया के लिए एक पोर्टल बनाने और उसे लागू करने का निर्देश दिया।
3. ज़मानत पाने के लिए आरोपी विदेशी नागरिक को समान राशि के दो ज़मानतदार पेश करने होंगे। हालांकि, अगर कोर्ट को लगता है कि काफी कोशिशों के बावजूद आरोपी के लिए दो ज़मानतदार (Sureties) का इंतज़ाम करना मुश्किल या नामुमकिन है, तो वह लिखित आदेश और कारण बताते हुए इस शर्त में ढील दे सकती है।
4. हर मामले में ज़मानतदारों की जांच तीन दिनों के अंदर पूरी हो जानी चाहिए। आरोपी को रिहा करने से पहले जांच रिपोर्ट ट्रायल कोर्ट के सामने पेश की जानी चाहिए। अगर तीन दिन की समय-सीमा का पालन नहीं किया जाता है तो इसके कारणों को दर्ज किया जाना चाहिए और संबंधित कोर्ट के ध्यान में लाया जाना चाहिए।
5. भारत में विदेशी नागरिक के रिहायशी पते और संपर्क की अन्य जानकारियों की, ज़मानत के आदेश के तीन दिनों के भीतर और आरोपी की रिहाई से पहले, भौतिक रूप से दोबारा जांच (Re-Verification) की जानी चाहिए, भले ही जांच के दौरान उन्हीं जानकारियों की पहले ही पुष्टि हो चुकी हो।
6. आरोपी को संबंधित कोर्ट में एक हलफनामा (Affidavit) दाखिल करना होगा, जिसमें भारत में आय या फंड के स्रोत और देश में मौजूद सभी बैंक खातों (यदि कोई हों) की जानकारी दी गई हो। जांच अधिकारी को आरोपी के मूल देश के दूतावास को भी कथित अपराध में आरोपी की संलिप्तता के बारे में लिखित रूप में सूचित करना होगा।
7. कानून और न्याय मंत्रालय और नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर (NIC) को एक सेंट्रलाइज़्ड डेटाबेस बनाना होगा, जिसमें NDPS मामले में विदेशी नागरिक आरोपी के लिए ज़मानतदार बनने वाले हर आरोपी और हर व्यक्ति का विवरण हो।
8. जहां कोई ज़मानतदार, जिसकी कथित तौर पर पुष्टि की गई थी, बाद में नकली पाया जाता है तो पुष्टि प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों - जिनमें पुलिस, कोर्ट और राजस्व अधिकारी शामिल हैं - को कर्तव्य में लापरवाही के लिए विभागीय जांच का सामना करना होगा।
9. भारत सरकार के गृह मंत्रालय और राज्यों में संबंधित विभागों को ऐसे अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए ज़रूरी गाइडलाइंस जारी करनी चाहिए।
10. जब कोई व्यक्ति किसी विदेशी नागरिक आरोपी के लिए ज़मानतदार बनता है तो ज़मानतदार की संपत्ति (जिसमें अचल संपत्ति भी शामिल है) पर ज़मानत बॉन्ड की रकम के बराबर का अधिकार या चार्ज (lien or charge) बनाया जाना चाहिए। अगर ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन होता है, तो संबंधित कोर्ट तथ्यों के आधार पर उस अधिकार या चार्ज को लागू करने का आदेश दे सकता है।
11. सभी हाई कोर्ट को संपत्ति और वित्तीय दस्तावेजों के तेज़ी से वेरिफिकेशन और ऑथेंटिकेशन के लिए डिजिटल पोर्टल बनाने के कदम उठाने चाहिए।
12. भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) के फॉर्म 47 के बाद एक अतिरिक्त फॉर्म 47A जोड़ा जाना चाहिए, जो कमर्शियल मात्रा वाले NDPS मामलों में विदेशी नागरिकों के लिए एक नया और विस्तृत ज़मानत-बॉन्ड और ज़मानतदार फॉर्म होगा।
कोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू, सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और AOR सना हाशमी [एमिक्स क्यूरी], और सीनियर एडवोकेट शादान फरासत के सुझावों के लिए उनकी सराहना की।
Case Title: Union of India v. Chidiebere Kingsley Nawchara & Ors.