दिल्ली सरकार ने कहा, 'मेरे सचिव मेरी बात नहीं सुनते'; DJB फंड पर GNCTD की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के वित्त सचिव को नोटिस जारी किया

Update: 2024-04-01 13:35 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (1 अप्रैल) को दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के लिए दिल्ली विधानसभा द्वारा अनुमोदित धनराशि जारी करने की मांग करने वाली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (GNCTD) द्वारा दायर याचिका पर दिल्ली के वित्त सचिव को नोटिस जारी किया।

दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया कि वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए दिल्ली विधानसभा द्वारा अनुमोदित दिल्ली जल बोर्ड को देय 1927 करोड़ रुपये की राशि जारी नहीं की गई।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने कहा कि वित्त सचिव से जवाब मांगा जाएगा। मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

दिल्ली के उपराज्यपाल की ओर से पेश सीनियर वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि एलजी का DJB को धन आवंटन से कोई लेना-देना नहीं है, जो वैधानिक निकाय है।

रोहतगी ने कहा कि धनराशि वित्त विभाग द्वारा जारी की जानी है, जो दिल्ली सरकार के अधीन है।

रोहतगी ने कहा,

"जल बोर्ड वैधानिक प्राधिकरण है। एलजी का इससे कोई लेना-देना नहीं है। उनकी कोई भूमिका नहीं है। यह बहुत अजीब है। याचिकाकर्ता जल मंत्री के माध्यम से GNCTD हैं, जो योजना मंत्री भी हैं और DJB के अध्यक्ष भी हैं। उनके पास ये सभी पद और वित्त हैं। असली प्रतिवादी उनके अपने सचिव हैं। मुझे नहीं पता कि यह किस तरह की याचिका है।''

उन्होंने यह भी बताया कि 2023-24 वित्तीय वर्ष पिछले साल समाप्त हो गया।

GNCTD की ओर से पेश सीनियर वकील डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी और वकील शादान फरासत ने कहा कि सचिव सरकार की बात नहीं सुन रहे हैं, क्योंकि संसद ने पिछले साल कानून पारित किया था। उक्त कानून में सिविल सेवकों पर सरकार के नियंत्रण को कम करने और उन्हें एलजी के अधिकार के अधीन बना दिया गया।

उन्होंने पीठ को यह भी बताया कि रिट याचिका दायर होने के बाद वित्त सचिव ने 31 मार्च को 760 करोड़ रुपये जारी किए, जिसका उपयोग उसी दिन लंबित बिलों को निपटाने के लिए किया गया।

रोहतगी ने जब कहा कि इसी तरह की याचिका हाईकोर्ट में दायर की गई। उक्त याचिका में आदेश पारित किए गए, तो फरासत ने कहा कि हाईकोर्ट ने तत्कालीन एडिशनल सॉलिसिटर जनरल संजय जैन को अधिकारियों के साथ बैठकर मामले को सुलझाने के लिए कहा था।

उन्होंने कहा,

"अधिकारी उस बैठक में भी शामिल नहीं हुए जो मिस्टर संजय जैन द्वारा निर्धारित की गई थी।"

उन्होंने प्रस्तुत किया कि 31 मार्च के अंत तक विधानसभा द्वारा अनुमोदित 1927 करोड़ रुपये की राशि अभी भी डीजेबी को भेजी जानी बाकी है।

सीजेआई ने रोहतगी से पूछा कि इन फंडों को जारी करने में क्या कठिनाई है?

रोहतगी ने दोहराया कि एलजी के पास कोई फंड नहीं है और इसे जीएनसीटीडी के वित्त विभाग द्वारा जारी किया जाना है।

फरासत ने कहा,

"मेरे सिविल सेवक मेरी बात नहीं सुनते।"

रोहतगी ने जब अनुच्छेद 32 के तहत सरकार द्वारा रिट याचिका की स्थिरता पर सवाल उठाया तो सिंघवी ने कहा,

"मिस्टर रोहतगी पेश होते हैं और कहते हैं कि उनका इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है, फिर याचिका खारिज करने के लिए कहते हैं।"

सिंघवी ने यह भी कहा,

"मेरे सचिव मेरी बात नहीं सुनते।"

रोहतगी ने जवाब दिया,

"अगर आपके सचिव आपकी बात नहीं सुनते हैं तो मुझे क्या करना चाहिए?"

सिंघवी ने जवाब दिया,

''तो फिर आकर विरोध मत कीजिए।''

फरासत ने कहा कि एलजी को प्रतिवादी बनाने का कारण यह था कि पिछले साल जीएनसीटीडी अधिनियम में पारित संशोधन के बाद एलजी सेवाओं का नियंत्रण प्राधिकारी है।

फरासत ने कहा,

"वित्तीय विभाग की अवज्ञा को देखते हुए मैंने एलजी को कई पत्र लिखे, लेकिन कुछ नहीं किया गया।"

सिंघवी ने कहा,

"वे केवल एलजी की बात सुनते हैं।"

सीजेआई ने कहा,

"हम वित्त सचिव से पूछेंगे..."

सीजेआई ने कहा कि एलजी को उत्तरदाताओं की सूची से हटाया जा सकता है।

आदेश में पीठ ने जीएनसीटीडी के बयान पर गौर किया कि वित्त वर्ष 23-24 के लिए डीजेबी को कुल 4578.15 करोड़ रुपये प्राप्त हुए , जिसमें 31 मार्च, 2024 को प्राप्त 760 करोड़ रुपये की राशि भी शामिल है। 1927 करोड़ बकाया था।

केस टाइटल: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार बनाम दिल्ली एलजी कार्यालय डब्ल्यू.पी.(सी) नंबर 197/2024

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