Guruvayur Temple | सुप्रीम कोर्ट का देवस्वोम बोर्ड को निर्देश: पिछले साल की तरह एकादशी पर उदयस्तमन पूजा जारी रखें
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवायुर श्री कृष्ण मंदिर के प्रशासन और मुख्य तांत्री (पुजारी) को निर्देश दिया कि वे 'वृश्चिकम एकादशी' (जो इस साल 21 नवंबर को है) पर उदयस्तमन पूजा उसी तरह जारी रखें, जैसे पहले की परंपरा के अनुसार होती रही है।
कोर्ट ने पिछले साल 25 अक्टूबर को दिए गए अपने उसी आदेश को दोहराया, जो मंदिर प्रशासन के उस फैसले के खिलाफ था जिसमें भीड़ प्रबंधन की चिंताओं के कारण एकादशी पर पूजा रद्द कर दी गई।
बता दें, यह विवाद तब शुरू हुआ था जब मंदिर प्रशासन ने तांत्री के समर्थन से भीड़ प्रबंधन में मुश्किलों और ज़्यादा भक्तों को दर्शन का समय देने की इच्छा का हवाला देते हुए वृश्चिकम एकादशी पर उदयस्तमन पूजा न करने का फैसला किया। मंदिर के पुश्तैनी पुजारी परिवार ने इस फैसले को चुनौती दी थी। उनका तर्क था कि यह फैसला सदियों पुरानी परंपरा का उल्लंघन है, क्योंकि यह पूजा एकादशी पर देवता की दिव्यता बढ़ाने के लिए की जाती है।
इस फैसले के खिलाफ परिवार केरल हाईकोर्ट पहुंचा, लेकिन उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज की गई कि गुरुवायुर देवस्वोम अधिनियम, 1978 के तहत धार्मिक और अनुष्ठानिक प्रथाओं से जुड़े मामलों में तांत्री ही अंतिम अधिकारी होता है। 11 दिसंबर, 2004 के आदेश के ज़रिए, कोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा कि पूजा तय कार्यक्रम के अनुसार होनी चाहिए।
अगले साल, भीड़ प्रबंधन के मुद्दों का हवाला देते हुए फिर से ऐसी ही याचिका दायर की गई, जिसके जवाब में कोर्ट ने दोहराया कि एकादशी पर पूजा होनी चाहिए।
इस साल फिर प्रशासन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने मामले की सुनवाई की। सीनियर एडवोकेट वी.वी. गिरि (तांत्री की ओर से) और आर्यमा सुंदरम (देवस्वोम बोर्ड की ओर से) ने भीड़ प्रबंधन में आ रही मुश्किलों का ज़िक्र किया। मंदिर के पुश्तैनी पुजारी परिवार का प्रतिनिधित्व सीनियर एडवोकेट सी.एस. वैद्यनाथन ने किया।
सुंदरम ने बेंच को बताया कि एकादशी के दिन 1 लाख से ज़्यादा लोग आते हैं, जिनमें सबरीमाला मंदिर के दर्शन के बाद आने वाले तीर्थयात्री भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि एकादशी को पूजा होनी चाहिए या नहीं, इस बड़े मुद्दे को अभी के लिए अलग रखा जा सकता है।
उन्होंने कहा,
"मेरा कहना है कि यह पूजा किसी भी दिन की जा सकती है। लेकिन एकादशी के दिन देवस्वोम इसकी ज़िम्मेदारी संभालता है क्योंकि उस दिन बहुत ज़्यादा लोग शामिल होते हैं।"
इन तर्कों का समर्थन करते हुए गिरी ने कहा कि यह पूजा भक्तों की ओर से की जाने वाली एक भेंट है, न कि कोई अनिवार्य रस्म, इसलिए इसे किसी भी तारीख को किया जा सकता है।
आगे कहा गया,
"यह एक भेंट है; अनिवार्य रस्में तो [हर हफ़्ते] करनी ही होती हैं। पिछले सालों में उदयस्थमन पूजा शनिवार या छुट्टियों के दिन नहीं की गई। अगर मैं मंदिर में यह पूजा करवाना चाहूं तो शायद मुझे 10 साल बाद बुकिंग मिलेगी। यह एक भेंट है, मुझे इसे किसी के नाम पर बुक करना होता है... जब यह बिना किसी रोक-टोक के चल रही थी, तो प्रशासन ने पाया कि आम दिनों में भक्त लगभग 15,000 होते हैं, लेकिन छुट्टियों और शनिवार को यह संख्या 25,000-30,000 हो जाती है।"
जस्टिस कुमार ने जवाब दिया कि उन्हें भीड़ के बारे में पता है, क्योंकि वे खुद 7 घंटे तक लाइन में खड़े रह चुके हैं।
फिर उन्होंने पूछा:
"क्या आप उदयस्थमन पूजा को पूरी तरह बंद करने जा रहे हैं?"
जवाब देने वालों ने कहा कि ऐसा नहीं है, उनकी बस इतनी सी गुज़ारिश है कि पूजा किसी और दिन तो की जा सकती है, लेकिन एकादशी के दिन नहीं।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि पूजा वैसे ही होती रहेगी जैसे रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार होती आई है।
मौजूदा अर्ज़ी का निपटारा करते हुए कोर्ट ने आदेश दिया:
"इसमें की गई मांग वैसी ही है जैसी पहले की गई, जिस पर इस कोर्ट ने 30.10.25 को राहत देते हुए और पैरा 6, 7 और 8 के अनुसार निर्देश देते हुए फ़ैसला सुनाया। पहले दिए गए आदेश को ध्यान में रखते हुए और अपील के अंतिम नतीजे के अधीन रहते हुए (अंतरिम राहत के तौर पर) हम निर्देश देते हैं कि 21.11.26 को पड़ने वाली एकादशी पर 'उदयास्तमन पूजा' उसी तरह की जाए जैसे पहले की जाती रही है। हालांकि, हम बोर्ड और तांत्रिक को यह छूट भी देते हैं कि 'उदयास्तमन पूजा' 22.10.26 को भी की जा सकती है, जैसा कि बताया गया है। IA का निपटारा किया जाता है। अपील की सुनवाई में तेज़ी लाई जाएगी।"
Case Title : P.C. HARY Vs GURUVAYOOR DEVASWOM MANAGING COMMITTEE