सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई व्यावसायिक प्रतिस्पर्धी, 'कीटनाशक अधिनियम, 1968' की धारा 10 के तहत दिए गए पंजीकरण को चुनौती नहीं दे सकता।

अदालत ने कहा कि इस अधिनियम की धारा 10 के तहत केवल तभी अपील की जा सकती है, जब पंजीकरण देने से इनकार कर दिया गया हो या मौजूदा पंजीकरण रद्द किया गया हो। कोई व्यावसायिक प्रतिस्पर्धी, किसी दूसरी कंपनी को मिले पंजीकरण प्रमाणपत्र को चुनौती देने के लिए इस प्रावधान का इस्तेमाल नहीं कर सकता।

जस्टिस एम.एम. सुंदेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला पलट दिया। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने 'न्यायिक समीक्षा' (Judicial Review) की तय सीमाओं का उल्लंघन किया, क्योंकि उसने इस अधिनियम के तहत काम करने वाले वैधानिक प्राधिकरणों के फैसलों पर 'अपीलीय प्राधिकरण' (Appellate Authority) की तरह काम किया।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब 'रजिस्ट्रेशन कमिटी' ने 'क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन' को 'कीटनाशक अधिनियम' की धारा 9(3) के तहत एक पंजीकरण प्रमाणपत्र दिया। इसके जरिए कंपनी को 'हेलोसल्फ्यूरॉन मिथाइल टेक्निकल' (Halosulfuron methyl technical) आयात करने और भारत में इसका फॉर्मूलेशन तैयार करने की अनुमति मिली।

एक व्यावसायिक प्रतिस्पर्धी 'धनुका एग्रीटेक लिमिटेड' (प्रतिवादी) ने अधिनियम की धारा 10 और 11 के तहत अपीलीय/पुनरीक्षण प्राधिकरण के सामने इस पंजीकरण को चुनौती दी। जब उनकी चुनौती खारिज हो गई तो धनुका ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सिंगल जज ने 'क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन' को मिले पंजीकरण को सही ठहराया। हालांकि, बाद में डिवीजन बेंच ने वह फैसला पलट दिया और पंजीकरण प्रमाणपत्र रद्द की।

इससे असंतुष्ट होकर 'क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन' सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई।

अपील स्वीकार करते हुए अदालत ने 'कीटनाशक अधिनियम' की धारा 10 की समीक्षा की, जिसमें पंजीकरण न होने या पंजीकरण रद्द होने के खिलाफ अपील करने का प्रावधान है।

अदालत ने प्रतिवादी के उस तर्क को खारिज किया, जिसमें उन्होंने इस प्रावधान में इस्तेमाल किए गए शब्द "कोई भी व्यथित व्यक्ति" (Any Person Aggrieved) का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि इस शब्द को उसी संदर्भ में पढ़ा जाना चाहिए, जिसके तहत अपील करने की अनुमति दी गई।

अदालत ने कहा,

"निश्चित रूप से, हमारे सामने मौजूद निजी प्रतिवादी को 'व्यथित व्यक्ति' (Person Aggrieved) नहीं माना जा सकता, जो 1968 के अधिनियम की धारा 10 के तहत अपील करने के अधिकार का इस्तेमाल कर सके।"

अदालत ने आगे कहा कि धारा 10 के तहत केवल पंजीकरण न होने या पंजीकरण रद्द होने के फैसले के खिलाफ ही अपील की जा सकती है। इस फैसले की जानकारी उस व्यक्ति को दी जानी चाहिए जिसे इसे चुनौती देने का अधिकार है।

अदालत ने यह भी कहा कि कार्यकारी फैसलों - खासकर व्यावसायिक इकाइयों को लाइसेंस देने वाले फैसलों - की न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित होता है। अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट ने अपीलीय प्राधिकरण की तरह काम करते हुए वैधानिक प्राधिकरणों के निष्कर्षों को पलट दिया, जबकि इन निष्कर्षों पर पहले ही सिंगल जज अपनी मुहर लगा चुके थे।

इसके अलावा, अदालत ने केंद्र सरकार के उस हलफनामे पर भी गौर किया, जिसमें पंजीकरण देने से पहले की गई जांच-पड़ताल का विवरण था। इसमें प्रयोगशाला परीक्षण भी शामिल था, जिसमें उत्पाद की शुद्धता 98.53% पाई गई।

हाईकोर्ट का फैसला कानून और तथ्यों के आधार पर गलत मानते हुए अदालत ने क्रिस्टल क्रॉप की अपील स्वीकार की और पंजीकरण प्रमाण पत्र को बहाल किया।

Case Title : CRYSTAL CROP PROTECTION LTD VERSUS DHANUKA AGRITECH LTD & ORS.

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