सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपनी पत्नी को "बेवकूफ" और "निकम्मी" कहना, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A के तहत अपने आप में 'क्रूरता' नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने यह टिप्पणी उस व्यक्ति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए की, जिस पर अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां, भले ही उन्हें पहली नजर में सच मान लिया जाए, तो भी ये ज्यादा से ज्यादा पति या पत्नी के स्वभाव को दर्शाती हैं। इन्हें 'आपराधिक धमकी' या 'गंभीर चोट' पहुंचाने के बराबर नहीं माना जा सकता, जिसके आधार पर पति को पत्नी की आत्महत्या के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सके—खासकर तब, जब इसके समर्थन में कोई सबूत या सामग्री मौजूद न हो।

कोर्ट ने कहा,

"किसी जीवनसाथी के स्वभाव से जुड़ी बातों को 'आपराधिक धमकी' या 'गंभीर चोट' पहुंचाने जैसे अपराध के बराबर नहीं माना जा सकता। इसलिए इसके आधार पर पति को पत्नी की आत्महत्या के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ऐसा करना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा, खासकर तब जब इस आरोप के समर्थन में कोई सबूत ही न हो।"

कोर्ट ने यह टिप्पणी उस पति के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए की, जिस पर कनाडा में अपनी पत्नी की आत्महत्या के बाद दहेज हत्या, क्रूरता और अन्य अपराधों का आरोप लगाया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने उस व्यक्ति के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की, जिसकी पत्नी ने टोरंटो (कनाडा) में आत्महत्या कर ली थी। यह FIR भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धाराओं 304B, 323, 498A और 504 (जो अब भारतीय न्याय संहिता, 2023/BNS की धाराओं 80, 115(2), 85 और 352 के तहत आती हैं) तथा दहेज निषेध अधिनियम, 1961 (DP Act) की धाराओं 3 और 4 के तहत दर्ज की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि दहेज की मांग या क्रूरता का कोई सबूत नहीं है, और लगाए गए आरोपों तथा मौत के बीच कोई संबंध नहीं है। कोर्ट ने माना कि इस मामले में मुकदमा आगे चलाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट (औरंगाबाद बेंच) का फैसला रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।

बता दें, बॉम्बे हाईकोर्ट ने पति के खिलाफ चल रही कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया था, जबकि उसके माता-पिता और बहन के खिलाफ कार्यवाही रद्द की थी।

Case Title : Piyush v. State of Maharashtra & Others (Diary No. 35774/2025)

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