सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (10 अगस्त, 2026 से 14 अगस्त, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
JJ Act | रेगुलर कोर्ट ने नाबालिग पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाया तो भी सज़ा का फ़ैसला रद्द नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी नाबालिग पर रेगुलर क्रिमिनल कोर्ट में मुक़दमा चलाया गया तो सिर्फ़ इस वजह से मामले के गुण-दोष के आधार पर हुई सज़ा (कनविक्शन) रद्द करने की ज़रूरत नहीं। इसी के अनुसार, कोर्ट ने एक ऐसे आरोपी की सज़ा (कनविक्शन) को तो बरकरार रखा, जिस पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाया गया था, लेकिन अपराध की तारीख़ पर उसके नाबालिग होने का पता चलने के बाद उसे सुनाई गई सज़ा रद्द कर दी।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की, जिसमें अपील करने वाले आरोपी पर रेगुलर कोर्ट में मुक़दमा चलाया गया और उसे हत्या के अपराध के लिए दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सज़ा सुनाई गई।
Cause Title: DINESH KUMAR VERSUS THE STATE OF HARYANA
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मकान मालिक-किरायेदार के बीच Agreement to Sell से किरायेदारी अपने आप खत्म नहीं होती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मकान मालिक और किरायेदार के बीच Agreement to Sell होने मात्र से मौजूदा किरायेदारी अपने आप समाप्त नहीं होती। किरायेदारी खत्म हुई या नहीं, यह Agreement to Sell की शर्तों या पक्षकारों के स्पष्ट आचरण से तय होगा।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की खंडपीठ ने कहा कि केवल Agreement to Sell पर हस्ताक्षर हो जाने से किरायेदारी समाप्त नहीं मानी जा सकती।
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बिजली का झटका लगने से हुई मौतों के लिए बिजली बोर्ड पर सख्त जवाबदेही लागू होती है, पूर्ण जवाबदेही नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि बिजली का झटका लगने से हुई मौतों या चोटों के लिए बिजली अधिकारियों को 'स्ट्रिक्ट लायबिलिटी' (सख्त जवाबदेही) के तहत जिम्मेदार ठहराया जा सकता है, लेकिन ऐसी जवाबदेही को बिना किसी अपवाद के 'एब्सोल्यूट लायबिलिटी' (पूर्ण जवाबदेही) नहीं माना जा सकता।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट की सिंगल और डिवीजन बेंच के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें कर्नाटक पावर ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन को बिजली का झटका लगने से हुई मौतों के लिए 'एब्सोल्यूट लायबिलिटी' (पूर्ण जवाबदेही) के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।
Cause Title: KARNATAKA POWER TRANSMISSION CORPORATION LIMITED VERSUS REKHA & ORS.
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S. 14 Limitation Act | रिकवरी का केस करने के लिए कंपनी बंद करने की कार्यवाही में लगा समय नहीं घटाया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (12 अगस्त) को कहा कि कंपनी बंद करने की कार्यवाही (वाइंडिंग अप प्रोसीडिंग्स) में लगा समय, लिमिटेशन एक्ट की धारा 14 के तहत रिकवरी का केस करने की समय-सीमा से नहीं घटाया जा सकता, क्योंकि दोनों कार्यवाहियों में मांगी गई राहत मूल रूप से अलग-अलग है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा, "...कंपनी बंद करने की कार्यवाही शुरू करने से - जिससे रिकवरी हो भी सकती है और नहीं भी - पैसे की रिकवरी के लिए अलग से केस करने की समय-सीमा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।"
Cause Title: Mageba Bridge Products Private Limited Versus M/s. Trade Centre
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अगर किसी व्यक्ति के पास गोपनीय जानकारी है और वह ट्रेडिंग करता है तो इसे इनसाइडर ट्रेडिंग माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 अगस्त) को कहा कि SEBI (इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक) रेगुलेशन, 2015 के तहत इनसाइडर ट्रेडिंग का अनुमान लगाने के लिए सिर्फ़ 'अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन' (UPSI) का पास होना और उस दौरान सिक्योरिटीज़ में ट्रेडिंग करना ही काफ़ी है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के आदेश को रद्द करते हुए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की अपील को मंज़ूरी दी। इसके साथ ही कोर्ट ने तारा ज्वेल्स लिमिटेड (TJL) के प्रमोटरों के ख़िलाफ़ रेगुलेटर का आदेश बहाल किया।
Cause Title: SECURITIES AND EXCHANGE BOARD OF INDIA VERSUS RAJEEV VASANT SHETH & ORS.
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ट्रायल से पहले बचाव पक्ष के सबूतों के आधार पर आपराधिक केस रद्द किया जा सकता है या नहीं, इसे परखने के 4 तरीके: सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
सुप्रीम कोर्ट ने फिर से कहा कि खास मामलों में, बचाव पक्ष के सबूतों या सरकारी रिकॉर्ड के आधार पर ट्रायल शुरू होने से पहले ही आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है। ऐसा तब किया जा सकता है जब वे सबूत पूरी तरह भरोसेमंद हों और उनसे यह साबित हो कि केस को आगे बढ़ाना कोर्ट की प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल होगा।
राहुल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में 11 अगस्त, 2026 को दिए गए फैसले में जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने राजीव थापर बनाम मदन लाल कपूर (2013) मामले में तय किए गए चार-चरणीय टेस्ट को लागू किया। बेंच ने माना कि बिना किसी विवाद वाले सरकारी सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है।
Cause Title: RAHUL VERSUS STATE OF UTTAR PRADESH AND ANOTHER