अगर किसी व्यक्ति के पास गोपनीय जानकारी है और वह ट्रेडिंग करता है तो इसे इनसाइडर ट्रेडिंग माना जाएगा: सुप्रीम कोर्ट
Shahadat
11 Aug 2026 8:40 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 अगस्त) को कहा कि SEBI (इनसाइडर ट्रेडिंग पर रोक) रेगुलेशन, 2015 के तहत इनसाइडर ट्रेडिंग का अनुमान लगाने के लिए सिर्फ़ 'अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इन्फॉर्मेशन' (UPSI) का पास होना और उस दौरान सिक्योरिटीज़ में ट्रेडिंग करना ही काफ़ी है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) के आदेश को रद्द करते हुए सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) की अपील को मंज़ूरी दी। इसके साथ ही कोर्ट ने तारा ज्वेल्स लिमिटेड (TJL) के प्रमोटरों के ख़िलाफ़ रेगुलेटर का आदेश बहाल किया।
इन प्रमोटरों ने कंपनी के बारे में प्रतिकूल और अप्रकाशित (अनपब्लिश्ड) वित्तीय जानकारी होने के बावजूद, वित्तीय नुकसान से बचने के लिए अपनी हिस्सेदारी का एक बड़ा हिस्सा बेच दिया था।
कोर्ट ने कहा,
"इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि प्रतिवादियों (रेस्पॉन्डेंट्स) के पास UPSI थी। इस बात पर भी कोई विवाद नहीं है कि ऐसी UPSI होने के दौरान उन्होंने अपनी हिस्सेदारी का बड़ा हिस्सा या पूरी हिस्सेदारी बेच दी थी। इसलिए रेगुलेशन 4(1) के साथ जुड़े नोट (जिसका ज़िक्र ऊपर किया गया है) को देखते हुए, बिक्री से मिली रकम का इस्तेमाल किस मकसद से किया गया, यह बात मायने नहीं रखती। यह तथ्य कि प्रतिवादियों ने उस समय ट्रेडिंग की थी, यह निष्कर्ष निकालने के लिए काफ़ी है कि उन्होंने इनसाइडर ट्रेडिंग की थी।"
कोर्ट ने रेगुलेशन 4(1) के साथ जुड़े नोट पर ज़ोर दिया, जिसमें कहा गया कि जब कोई व्यक्ति UPSI होने के दौरान ट्रेडिंग करता है तो यह माना जाता है कि ट्रेडिंग उसके पास मौजूद जानकारी से प्रेरित थी। ट्रेडिंग करने के कारण या बिक्री से मिली रकम का मकसद, यह तय करने में मायने नहीं रखते कि रेगुलेशन का उल्लंघन हुआ है या नहीं।
कोर्ट ने कहा,
"कम मुनाफ़ा या कोई मुनाफ़ा न होना, कोई मायने नहीं रखता।"
Cause Title: SECURITIES AND EXCHANGE BOARD OF INDIA VERSUS RAJEEV VASANT SHETH & ORS.


