राजस्थान हाईकोर्ट ने कथित भ्रामक विज्ञापन को लेकर एक्टर सलमान खान के खिलाफ कार्यवाही पर लगाई रोक
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक्टर सलमान खान के खिलाफ जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, जयपुर II में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाई। यह मामला राजश्री पान मसाला के कथित भ्रामक विज्ञापन से जुड़ा है, जिसमें एक्टर ने अभिनय किया था।
ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने DCDRC के 6 जनवरी के अंतरिम आदेश पर भी रोक लगाई। इस आदेश में उत्पाद बेचने वाली कंपनी और एक्टर को किसी भी तरह के भ्रामक प्रचार में शामिल होने से रोका गया था।
कोर्ट ने राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC) के 16 मार्च के आदेश पर भी रोक लगाई। इस आदेश में राज्य आयोग ने DCDRC के 15 जनवरी के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया था, जिसमें एक्टर के खिलाफ वारंट जारी किए गए।
जस्टिस अनूप सिंह ने अपने आदेश में कहा:
"...प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए। एडवोकेट हिम्मत सिंह, प्रतिवादी नंबर 1 – योगेंद्र सिंह बडियाल की ओर से पेश हुए, जो स्वयं भी इस कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हैं। एडवोकेट दिवेश शर्मा ने प्रतिवादी नंबर 2 की ओर से नोटिस स्वीकार किया। अतः, नोटिस की तामील पूरी हो चुकी है और अलग से नोटिस दाखिल करने की आवश्यकता नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील को निर्देश दिया जाता है कि वे आज से सात दिनों के भीतर प्रतिवादियों के वकीलों के कार्यालयों में रिट याचिका की एक प्रति सौंप दें। एडवोकेट हिम्मत सिंह और एडवोकेट दिवेश शर्मा के नाम, उनके संबंधित प्रतिवादियों के वकील के तौर पर 'कॉज़ लिस्ट' (मामलों की सूची) में दिखाए जाएं। प्रतिवादियों के वकीलों ने रिट याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय मांगा, जिसे स्वीकार किया गया।
इस मामले को 12.05.2026 को एस.बी. सिविल रिट याचिका संख्या 5836/2026 के साथ सूचीबद्ध किया जाए।
इस बीच, और अगली तारीख तक, 16.03.2026 के आदेश (संलग्नक-P-2), 06.01.2026 के आदेश (संलग्नक-P-3) और जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, जयपुर II में लंबित उपभोक्ता शिकायत नंबर 879/2025 में आगे की कार्यवाही के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक रहेगी।"
एक्टर ने राजस्थान राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (SCDRC) के 16 मार्च के आदेश और जयपुर II जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) द्वारा 6 जनवरी को पारित आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी।
अभिनेता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट जी.एस. बापना ने दलील दी कि DCDRC के समक्ष उपभोक्ता शिकायत दायर की गई, जिसमें आरोप लगाया गया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित "राजश्री पान मसाला" के विज्ञापन भ्रामक हैं, जन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और नियामक ढांचों का उल्लंघन करते हैं।
यह तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता को शिकायत में प्रतिवादी के रूप में केवल इस आधार पर शामिल किया गया कि वह प्रतिवादी नंबर 2 (कमला कांत एंड कंपनी LLP, जो राजश्री पान मसाला की मालिक है) के "सिल्वर कोटेड इलायची" उत्पाद का ब्रांड एंबेसडर है और कथित तौर पर पान मसाला के विज्ञापन में दिखाई दिया।
यह दलील दी गई कि याचिकाकर्ता ने केवल प्रतिवादी नंबर 2 के "सिल्वर-कोटेड इलायची" उत्पाद का समर्थन किया, और उसने कभी भी प्रतिवादी नंबर 2 के पान मसाला उत्पाद का विज्ञापन या समर्थन नहीं किया। इसलिए यह शिकायत प्रथम दृष्टया तुच्छ और गलत धारणा पर आधारित है।
यह दलील दी गई कि DCDRC के पास 'झूठे या भ्रामक विज्ञापन' से संबंधित शिकायत पर सुनवाई करने का अधिकार क्षेत्र नहीं था, क्योंकि ऐसी कोई भी शिकायत केवल केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के समक्ष ही दायर की जा सकती है। माननीय राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस तथ्य का संज्ञान लेने के बावजूद, पुनर्विचार याचिका खारिज करके गलती की।
यह दलील दी गई कि शिकायतकर्ता द्वारा अपने पक्ष में प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में बुरी तरह विफल रहने के बावजूद, DCDRC, जयपुर II द्वारा दिनांक 06.01.2026 का अंतरिम आदेश पारित किया गया। दिनांक 06.01.2026 का अंतरिम आदेश याचिकाकर्ता को कभी भी तामील (serve) नहीं किया गया। इसलिए शिकायतकर्ता के पास 15.01.2026 को अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का कोई भी अवसर नहीं था, और DCDRC के लिए तो याचिकाकर्ता को आदेश की तामील के संबंध में कोई निष्कर्ष दर्ज किए बिना, उस पर जमानती वारंट जारी करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। यह बताया गया कि DCDRC द्वारा 15.01.2026 को पारित आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता ने पहले ही राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) के समक्ष अपील दायर की।
इस बीच राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बुधवार (8 अप्रैल) को एक अंतरिम आदेश में DCDRC द्वारा अभिनेता के खिलाफ जारी किए गए जमानती गिरफ्तारी वारंट को स्थगित किया था।
Case title: Salman Khan v/s Yogendra Singh Badiyal, Advocate & Anr.