राजस्थान हाई कोर्ट ने पति के जीवित रहते हुए अलग रह रही पत्नी की फैमिली पेंशन में नॉमिनी के तौर पर नाम शामिल करने की याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने अलग रह रही पत्नी की याचिका खारिज की, जिसमें उसने अपने पति के पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) में नॉमिनी के तौर पर अपना नाम शामिल करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि चूंकि पति अभी जीवित है, इसलिए यह याचिका समय से पहले दायर की गई।
जस्टिस अशोक कुमार जैन की बेंच ने कहा कि जब तक पति जीवित है, तब तक याचिकाकर्ता को पति की मृत्यु के बाद फैमिली पेंशन पाने के लिए PPO में नॉमिनी के तौर पर अपना नाम शामिल करने का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।
आगे कहा गया,
"याचिकाकर्ता को यह दावा करने का कोई अधिकार नहीं है कि PPO में नॉमिनी के तौर पर उसका नाम शामिल किया जाए ताकि वह प्रतिवादी नंबर 5 की मृत्यु के बाद फैमिली पेंशन प्राप्त कर सके। रिट याचिका समय से पहले दायर की गई और जब तक प्रतिवादी नंबर 5 जीवित है, तब तक यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। जब फैमिली पेंशन का मुद्दा उठेगा, तब याचिकाकर्ता अपना दावा पेश कर सकती है और कानून के अनुसार उचित कार्यवाही कर सकती है, लेकिन इस चरण में नहीं जब प्रतिवादी नंबर 5 जीवित है। इसलिए रिट याचिका खारिज किए जाने योग्य है।"
बता दें, याचिकाकर्ता की शादी 1978 में प्रतिवादी के साथ हुई, जिसके बाद प्रतिवादी ने तलाक के लिए अर्जी दी थी। तलाक की कार्यवाही खारिज कर दी गई और सुप्रीम कोर्ट ने भी उस खारिज आदेश को बरकरार रखा था।
प्रतिवादी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, कोटा से रिटायर्ड प्रोफेसर थे और पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। याचिकाकर्ता की शिकायत थी कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले अन्य लाभों के साथ-साथ फैमिली पेंशन प्राप्त करने के लिए नॉमिनी के तौर पर उसका नाम शामिल नहीं किया गया।
इसके विपरीत प्रतिवादी के वकील ने तर्क दिया कि जब तक प्रतिवादी जीवित है, तब तक याचिकाकर्ता को फैमिली पेंशन के लिए नॉमिनी के तौर पर अपना नाम शामिल करने का दावा करने का कोई अधिकार नहीं है।
तर्कों को सुनने के बाद कोर्ट ने कहा,
"पेंशन स्वयं अर्जित (खुद कमाई गई संपत्ति) होती है, जो किसी व्यक्ति को उसकी व्यक्तिगत नौकरी, सेवा और योगदान के माध्यम से प्राप्त लाभ है। ऐसी स्वयं अर्जित संपत्ति को वह व्यक्ति हस्तांतरित कर सकता है जिसने इसे अपने जीवनकाल में अर्जित किया हो।"
कोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता को यह दावा करने का कोई अधिकार नहीं है कि PPO में नॉमिनी के तौर पर उसका नाम शामिल किया जाए ताकि वह प्रतिवादी की मृत्यु के बाद फैमिली पेंशन प्राप्त कर सके। यह निष्कर्ष निकाला गया कि याचिका समय से पहले दायर की गई। इसलिए इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब भी पारिवारिक पेंशन का मामला उठे, याचिकाकर्ता अपना दावा पेश कर सकती है और उचित कानूनी कार्यवाही शुरू कर सकती है।
इसके अनुसार, याचिका खारिज की गई।
Title: Smt. Santosh Pareek v State of Rajasthan & Ors.