विदेश यात्रा करने के इच्छुक आरोपी को ज़मानत मिलने के बाद LOC वापस लेने के लिए SOP बनाने की मांगा: राजस्थान हाईकोर्ट ने मांगी जानकारी

Update: 2026-06-12 16:15 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और एडवोकेट जनरल से मदद मांगी ताकि वे कोर्ट को उन कदमों के बारे में बता सकें, जो उन आरोपियों को ज़मानत मिलने की जानकारी अधिकारियों को समय पर देने के लिए SOP (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) बनाने के लिए उठाए गए, जिनके खिलाफ LOC जारी किया गया, ताकि उसे वापस लिया जा सके।

जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने उस तरीके के बारे में भी स्पष्टता मांगी, जो किसी आरोपी को रेगुलर ज़मानत मिलने पर एविएशन डिपार्टमेंट/एयरपोर्ट अधिकारियों को समय पर जानकारी देने और यह सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया कि ऐसे व्यक्ति के खिलाफ पहले जारी किया गया कोई भी LOC उसके बाद वापस ले लिया जाए।

कोर्ट ने कहा,

"इस कोर्ट के सामने एक मुद्दा उठा है कि अधिकारियों को LOC वापस लेने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए और याचिकाकर्ता को विदेश यात्रा की अनुमति देने के संबंध में निचली अदालत द्वारा पारित आदेश की असलियत की जांच कैसे की जाए। इस कोर्ट द्वारा 11.05.2026 को पारित आदेश के अनुसार, सीनियर एडवोकेट भरत व्यास, ASG पेश हुए और उन्होंने कहा कि इस क्रिमिनल रिट याचिका में उठाए गए मुद्दे के संबंध में संबंधित अधिकारियों को उचित पत्र लिखा जाएगा।

इस मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए यह कोर्ट एडिशनल सॉलिसिटर जनरल और एडवोकेट जनरल से मदद मांगता है ताकि वह इस कोर्ट को उस स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के बारे में बता सकें, यदि कोई तैयार किया गया है ताकि इस मामले में पैदा हुई स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।"

बता दें, याचिकाकर्ता के खिलाफ IPC की धारा 498-A के तहत FIR दर्ज की गई, जिसके बाद उसकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए LOC जारी किया गया। याचिकाकर्ता ट्रायल कोर्ट के सामने पेश हुआ और उसे ज़मानत मिल गई। बाद में उसने विदेश यात्रा की अनुमति के लिए आवेदन किया, जो उसे मिल भी गई।

हालांकि, जब याचिकाकर्ता देश छोड़ रहा था तो जारी किए गए LOC के आधार पर उसे एयरपोर्ट पर रोक लिया गया। याचिकाकर्ता ने कहा कि इमिग्रेशन अधिकारी ने LOC की असलियत की जांच करने के बजाय उसे रोक लिया और उसे जाने नहीं दिया।

इसलिए यह याचिका दायर की गई। इस मामले के संबंध में, सरकार की ओर से कहा गया कि संबंधित अधिकारियों को उचित पत्र लिखा जाएगा।

याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए व्यापक मुद्दे के संबंध में कोर्ट ने ASG और AG से मदद मांगी ताकि इस स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए तैयार की गई SOP के बारे में जानकारी मिल सके।

आगे कहा गया,

“संबंधित अधिकारियों द्वारा ऐसी SOP बनाने के लिए उठाए गए कदम ताकि इस मामले जैसी स्थितियों से निपटा जा सके और एक ऐसा तरीका विकसित किया जा सके, जिससे एविएशन विभाग/एयरपोर्ट अधिकारियों को किसी आरोपी व्यक्ति को नियमित ज़मानत मिलने के बारे में समय पर सूचित किया जा सके। यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऐसे आरोपी व्यक्ति के खिलाफ जारी LOC को तुरंत वापस लिया जा सके।”

यह मामला 13 जुलाई, 2026 के लिए सूचीबद्ध है।

Title: Rishav Khemka v Union of India & Ors.

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