मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट घोषित भूमि का उपयोग नहीं बदला जा सकता, विपरीत कार्रवाई अवैध: राजस्थान हाईकोर्ट

Update: 2026-07-18 14:30 GMT

राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि किसी भूमि को मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट के रूप में अधिसूचित किया गया है, तो उसके भूमि उपयोग परिवर्तन, नियमितीकरण या पट्टा जारी करने जैसी सभी प्रशासनिक कार्रवाइयों को मास्टर प्लान के अनुरूप ही होना होगा। इसके विपरीत की गई कोई भी कार्रवाई अवैध होगी और रद्द की जा सकती है।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने यह फैसला उस याचिका पर सुनाया, जिसमें धारा 90A, राजस्थान भूमि राजस्व अधिनियम के तहत ग्रीन बेल्ट की भूमि का उपयोग बदलकर पट्टे जारी किए गए थे। बाद में प्राधिकरण ने इन कार्यवाहियों को कानून के विपरीत बताते हुए निरस्त कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि मास्टर प्लान केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं, बल्कि कानूनी रूप से बाध्यकारी (Statutory Instrument) है। ग्रीन बेल्ट का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिक संतुलन और योजनाबद्ध शहरी विकास सुनिश्चित करना है। इसलिए ग्रीन बेल्ट की भूमि का आवासीय या व्यावसायिक उपयोग कानून के उद्देश्य को विफल करता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भूमि उपयोग परिवर्तन का आदेश ही अवैध है, तो उसके आधार पर जारी पट्टे भी स्वतः अवैध होंगे। Bona Fide Purchaser, Estoppel और अनुच्छेद 300A का संरक्षण भी ऐसे मामलों में उपलब्ध नहीं होगा। इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।

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