राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण में खाली पद भरें, वरना DoP के प्रधान सचिव को पेश होना होगा: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने कार्मिक विभाग (DoP) के प्रधान सचिव को निर्देश दिया कि अगर अगली सुनवाई की तारीख से पहले राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण, जयपुर में खाली पदों पर नियुक्तियां नहीं की जाती हैं तो उन्हें व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होना होगा।
जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने एडवोकेट जनरल का यह बयान दर्ज करने के बाद यह निर्देश जारी किया कि न्यायाधिकरण के दो सदस्यों की नियुक्ति एक सप्ताह के भीतर कर दी जाएगी।
एक प्रैक्टिसिंग वकील द्वारा दायर रिट याचिका में बताया गया कि राजस्थान सिविल सेवा अपीलीय न्यायाधिकरण में चेयरमैन, न्यायिक सदस्यों और प्रशासनिक सदस्यों के पद खाली पड़े हैं, जिससे न्यायाधिकरण काम नहीं कर पा रहा है। यह भी कहा गया कि इसके परिणामस्वरूप, बड़ी संख्या में सरकारी कर्मचारी अपील के कानूनी उपाय का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं और लंबित मामले बिना किसी कार्रवाई के पड़े हैं।
याचिकाकर्ता ने आगे बताया कि यह मुद्दा और भी महत्वपूर्ण हो गया, क्योंकि राज्य सरकार ने हाल ही में हजारों कर्मचारियों के तबादले के आदेश जारी किए, जिससे उनके पास अपने तबादलों को चुनौती देने या न्यायाधिकरण के समक्ष अपनी शिकायतों के समाधान के लिए कोई प्रभावी मंच नहीं बचा है।
सुनवाई के दौरान, एडवोकेट जनरल ने कोर्ट को सूचित किया कि न्यायाधिकरण के दो सदस्यों की नियुक्ति एक सप्ताह के भीतर कर दी जाएगी।
इस बयान को रिकॉर्ड पर लेते हुए बेंच ने मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त, 2026 तय की और यह स्पष्ट किया कि यदि अगली सुनवाई की तारीख से पहले नियुक्तियां नहीं की जाती हैं तो कार्मिक विभाग के प्रधान सचिव को कोर्ट में पेश होना होगा।
Title: Dilip Singh Kurka v State of Rajasthan
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