शादी के 4 साल बाद पति पर ड्रग्स, काला जादू और दुष्कर्म के आरोप; राजस्थान हाईकोर्ट ने FIR रद्द की
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा अपने पति के खिलाफ दर्ज उस FIR को रद्द कर दिया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पति ने ड्रग्स, दवाइयों और काले जादू का इस्तेमाल कर उसे शादी के लिए मजबूर किया और बाद में उसके साथ दुष्कर्म किया। अदालत ने कहा कि यह आपराधिक कार्यवाही कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है।
जस्टिस अनूप कुमार ढंड की पीठ ने कहा कि FIR शादी के लगभग चार साल बाद और बेटी के जन्म के एक साल बाद दर्ज कराई गई। अदालत ने पाया कि आरोप अस्पष्ट और प्रथम दृष्टया अविश्वसनीय हैं।
मामले में महिला, जो पहले से तलाकशुदा थी, ने पति से स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत अंतरधार्मिक विवाह किया था। शादी के बाद दोनों ने अपनी सुरक्षा के लिए हाईकोर्ट का रुख भी किया था और उनके यहां एक बेटी का जन्म हुआ।
बाद में महिला ने आरोप लगाया कि पति ने काले जादू, दवाइयों और नशीले पदार्थों के प्रभाव में लाकर उससे शादी की और उसके साथ दुष्कर्म किया। इसके आधार पर पति के खिलाफ IPC तथा राजस्थान प्रिवेंशन ऑफ विच हंटिंग एक्ट, 2015 के तहत मामला दर्ज किया गया।
पति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वह महिला का कानूनी रूप से विवाहित पति है, इसलिए IPC की धारा 375 के अपवाद-2 (Exception 2) के अनुसार दुष्कर्म का अपराध नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने इस दलील से सहमति जताते हुए कहा कि दुष्कर्म का आरोप प्रथम दृष्टया नहीं बनता और अन्य आरोपों के समर्थन में भी पर्याप्त सामग्री नहीं है। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों से प्रतीत होता है कि महिला ने विवाह के कई वर्ष बाद अपना मन बदलने के बाद FIR दर्ज कराई।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने माना कि FIR कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है और पति के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।