वकील से मारपीट के आरोप की जांच में गंभीर खामियां, राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस आयुक्त को निगरानी का दिया निर्देश
राजस्थान हाईकोर्ट ने वकील के साथ कथित मारपीट और अभद्रता के मामले की जांच में गंभीर खामियों पर चिंता जताते हुए पुलिस आयुक्त को स्वयं जांच की निगरानी करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और पक्षपात रहित होनी चाहिए।
जस्टिस अनिल कुमार उपमन की पीठ उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक वकील ने आरोप लगाया कि रेस्तरां में भोजन करने के बाद लौटते समय कुछ पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की और अभद्र व्यवहार किया।
याचिकाकर्ता का यह भी आरोप था कि संबंधित पुलिसकर्मी उस समय शराब के नशे में थे, इसलिए निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं की जा सकती।
याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि लिखित अनुरोध के बावजूद आरोपित पुलिसकर्मियों का यह पता लगाने के लिए कोई मेडिकल टेस्ट नहीं कराया गया कि घटना के समय वे शराब के प्रभाव में थे या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि FIR दर्ज होने के कई दिन बाद तक जांच अधिकारी ने किसी भी स्वतंत्र गवाह का बयान दर्ज नहीं किया, जबकि रेस्तरां के मालिक, कर्मचारियों और वहां मौजूद ग्राहकों से पूछताछ कर घटना की पुष्टि की जा सकती थी।
मामले की केस डायरी का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने अब तक की जांच पर असंतोष व्यक्त किया।
अदालत ने कहा,
"प्रथम दृष्टया यह न्यायालय अब तक की गई जांच से संतुष्ट नहीं है, क्योंकि याचिकाकर्ता के स्पष्ट आरोप और लिखित मांग के बावजूद यह पता लगाने के लिए कोई मेडिकल टेस्ट नहीं कराया गया कि आरोपित पुलिसकर्मी घटना के समय शराब के प्रभाव में थे या नहीं। इसके अलावा आज तक किसी भी निष्पक्ष या स्वतंत्र व्यक्ति का बयान भी दर्ज नहीं किया गया।"
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के दौरान रेस्तरां के सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग जब्त कर ली गई, फिर भी वहां मौजूद लोगों के बयान दर्ज न करने का कोई औचित्य नहीं है।
अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी का दायित्व था कि वह रेस्तरां के मालिक, कर्मचारियों और घटना के समय मौजूद ग्राहकों के बयान दर्ज करता।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह आरोपित पुलिसकर्मियों का मेडिकल जांच न कराने और स्वतंत्र गवाहों के बयान तत्काल दर्ज न करने के कारणों का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे।
साथ ही अदालत ने पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया कि वह व्यक्तिगत रूप से जांच की निगरानी करें और यह सुनिश्चित करें कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना किसी पक्षपात के संपन्न हो।
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