11 साल बाद भी चार्जशीट नहीं 'चौंकाने वाला': त्वरित जांच के लिए पुलिस के जांच और कानून-व्यवस्था विंग अलग करने के निर्देश—राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक मामले में गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि एफआईआर दर्ज होने के 11 वर्ष बाद भी चार्जशीट दाखिल न होना अत्यंत चिंताजनक है। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि कई मामलों में जांच लंबित रहने का एक प्रमुख कारण यह है कि एक ही जांच अधिकारी को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जांच—दोनों जिम्मेदारियां सौंप दी जाती हैं।
जस्टिस अनूप कुमार धंध की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट के प्रकाश सिंह बनाम यूनियन ऑफ इंडिया (2006) मामले का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों को पुलिस के जांच विंग और कानून-व्यवस्था विंग को अलग करने के लिए नीति या कानून बनाना चाहिए था, लेकिन दो दशक बीत जाने के बाद भी इस दिशा में पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए।
यह मामला उन याचिकाओं से संबंधित था, जिनमें वर्ष 2014 में दर्ज एफआईआर में अब तक चार्जशीट दाखिल नहीं की गई थी, जबकि अदालत द्वारा जांच अधिकारी को कई बार निर्देश दिए गए थे। जांच अधिकारी ने देरी का कारण लगातार कानून-व्यवस्था से जुड़ी ड्यूटी बताई।
इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि जांच और कानून-व्यवस्था के लिए अलग-अलग पुलिस विंग बनाने हेतु उचित नीति तैयार की जाए। इसके लिए मुख्य सचिव, अतिरिक्त मुख्य सचिव और डीजीपी को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
साथ ही, कोर्ट ने संबंधित जांच अधिकारी को 6 सप्ताह के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया और पुलिस आयुक्त तथा अतिरिक्त पुलिस आयुक्त को आदेश के अनुपालन की निगरानी करने तथा उल्लंघन की स्थिति में उचित कार्रवाई करने को कहा।