नाबालिग होने पर अनुकंपा नियुक्ति का दावा नहीं: राजस्थान हाइकोर्ट ने याचिका खारिज की
राजस्थान हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के समय यदि उसका आश्रित निर्धारित न्यूनतम आयु से कम है तो वह अनुकंपा नियुक्ति के लिए दावा नहीं कर सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि सरकार को इस आधार पर अनिश्चित समय तक इंतजार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता कि नाबालिग आश्रित बाद में वयस्क हो जाएगा।
जस्टिस कुलदीप माथुर की पीठ ने सरकारी कर्मचारी के बेटे द्वारा दायर याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने अपने आवेदन को खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी।
मामले में याचिकाकर्ता के पिता असिस्टेंट इंजीनियर के अधीन हेल्पर के पद पर कार्यरत थे और कोविड काल के दौरान उनका निधन हो गया। इसके बाद बेटे ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया। हालांकि पिता की मृत्यु के समय उसकी आयु केवल 15 वर्ष थी, इसलिए आवेदन खारिज कर दिया गया।
राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि मृत कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन करने के लिए कम-से-कम 16 वर्ष की आयु का होना आवश्यक है। चूंकि याचिकाकर्ता उस समय निर्धारित आयु से कम था, इसलिए उसका आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता।
याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि न्यूनतम आयु की शर्त आवेदन की तारीख पर लागू होनी चाहिए, न कि कर्मचारी की मृत्यु के समय। इसलिए आवेदन खारिज किया जाना कानून के अनुरूप नहीं है।
हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार की दलील से सहमति जताते हुए कहा कि यदि किसी आश्रित की आयु कर्मचारी की मृत्यु के समय निर्धारित सीमा से कम है तो उसका दावा जीवित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि सरकार या संबंधित विभाग को यह कहकर इंतजार करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता कि नाबालिग के वयस्क होने के बाद आवेदन लिया जाएगा।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि आयु से संबंधित पात्रता की शर्त मृत कर्मचारी के आश्रित बच्चों के लिए निर्धारित है, न कि उसकी पत्नी के लिए। इसलिए आर्थिक कठिनाई को कम करने के लिए मृत कर्मचारी की पत्नी स्वयं अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन कर सकती है।
इन टिप्पणियों के साथ हाइकोर्ट ने याचिका का निस्तारण किया।