हिंसक विरोध करना, सरकार के खिलाफ नारेबाजी या असहमति व्यक्त करना राजद्रोह नहीं: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

Update: 2026-07-14 04:47 GMT

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि केवल हिंसक विरोध प्रदर्शन में भाग लेना, सरकार के खिलाफ नारे लगाना या असहमति व्यक्त करना स्वचालित रूप से देशद्रोह का अपराध नहीं है।

जस्टिस विनोद एस भारद्वाज और जस्टिस सुखविंदर कौर ने कहा,

"हिंसक विरोध को दंगा माना जा सकता है, लेकिन हिंसा की ऐसी कार्रवाई को सरकार के खिलाफ नफरत या अवमानना ​​का कार्य नहीं माना जाएगा। एक निर्वाचित लोकतंत्र में सरकार या शासन के खिलाफ नारेबाजी, उसके नागरिकों के खिलाफ राजद्रोह के आरोप लगाने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।"

न्यायालय ने आगे कहा,

"हताशा या असंतोष या आक्रोश भी असंतोष या घृणा नहीं है। इसलिए न्यायालय को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि जब आरोप गंभीर हो और सजा कठोर हो, तो सामग्री और उनका अस्तित्व सख्त हो।"

कथित तौर पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की सजा के विरोध में अगस्त 2017 में कैथल के कलायत में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम लिमिटेड (UHBVN) के कार्यालय में तोड़फोड़ और आग लगाने के आरोपी चार लोगों को बरी करने के खिलाफ राज्य की अपील को खारिज करते हुए ये टिप्पणियां की गईं।

अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष या तो अभियुक्तों की पहचान या राजद्रोह, आगजनी और शरारत सहित अपराधों की सामग्री स्थापित करने में विफल रहा है।

इसमें कहा गया,

"रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य केवल सरकार के खिलाफ नारे का संकेत है, जो केवल असहमति व्यक्त करने का एक साधन है, न कि घृणा/तिरस्कार या अप्रसन्नता।"

Title: State of Haryana v. DHARAMPAL AND OTHERS

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