हमले में कृपाण का इस्तेमाल करने के आरोपी सिख व्यक्ति पर आर्म्स एक्ट के तहत आरोप सही: पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

Update: 2026-08-05 04:07 GMT

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि कृपाण का इस्तेमाल करके चोट पहुँचाने के आरोपी सिख व्यक्ति को आरोप तय करने के चरण में संविधान के आर्टिकल 25 के स्पष्टीकरण I (Explanation I) के तहत मिलने वाली संवैधानिक सुरक्षा का दावा करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने माना कि कृपाण को आस्था की ज़रूरी चीज़ के तौर पर रखा गया था या हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया, इसका फ़ैसला सिर्फ़ ट्रायल के दौरान ही हो सकता है।

इस तरह कोर्ट ने उन आरोपियों के समूह के ख़िलाफ़ IPC की धारा 307 (हत्या की कोशिश) के तहत लगे आरोप को सही ठहराया, जिन्होंने कथित तौर पर बहस के बाद तलवारों से शिकायतकर्ता पर हमला किया था।

जस्टिस वीरेंद्र अग्रवाल ने कहा,

"इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि सिख धर्म के अनुयायी को आस्था की चीज़ के तौर पर कृपाण पहनने और साथ रखने का संवैधानिक अधिकार है। हालाँकि, क्या याचिकाकर्ता नंबर 1 संविधान के आर्टिकल 25 के तहत संवैधानिक सुरक्षा का फ़ायदा पाने का हकदार है, यह सवाल ट्रायल के दौरान पेश किए जाने वाले सबूतों पर निर्भर करेगा। क्योंकि आरोप हैं कि कृपाण का इस्तेमाल शिकायतकर्ता को चोट पहुंचाने के लिए किया गया और इसे आस्था की चीज़ के बजाय हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया गया।"

कोर्ट ने आगे कहा कि इस चरण में कोर्ट के सामने ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया गया है जिससे यह पक्के तौर पर साबित हो सके कि याचिकाकर्ता नंबर 1 अमृतधारी सिख है या उसके पास मौजूद कृपाण को आस्था की ज़रूरी चीज़ के तौर पर पहना या रखा गया।

कोर्ट ने कहा,

"ये तथ्य से जुड़े विवादित सवाल हैं जिनका फ़ैसला आरोप तय करने के चरण में पक्के तौर पर नहीं किया जा सकता।"

अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 अगस्त 2023 की शाम को शिकायतकर्ता हरजीत सिंह अपने पाँच साथियों के साथ भांगड़ा प्रैक्टिस पूरी करने के बाद करनाल के मॉडल टाउन स्थित ब्राउन बेकरी रेस्टोरेंट गए।

रात के खाने के बाद रेस्टोरेंट के बाहर अपनी गाड़ियों के पास खड़े होने पर उन्होंने आरोपी कुलवंत सिंह को एक काली थार जीप में बैठे देखा। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि कुलवंत सिंह ने बार-बार अपनी गाड़ी की खिड़की नीचे की, मूंछों पर ताव देते हुए शिकायतकर्ता के समूह को गुस्से भरी नज़रों से देखा, उनके आस-पास गाड़ी चलाई, ज़ोर से म्यूज़िक बजाया और शराब पीते रहे। शिकायतकर्ता को कुलवंत सिंह के चचेरे भाई गुरबख्श सिंह का फ़ोन आया, जिसमें बताया गया कि कुलवंत सिंह शराब के नशे में है और वह उसे शांत करने आ रहा है। हालांकि, इसके कुछ ही देर बाद अन्य आरोपी अलग-अलग गाड़ियों में वहां पहुंचे और कथित तौर पर मिलकर हमला किया।

अभियोजन पक्ष ने खास तौर पर आरोप लगाया कि आरोपी कुलवंत सिंह ने शिकायतकर्ता के सिर पर निशाना साधकर कृपाण (तलवार) से हमला किया; आरोपी मेहताब सिंह ने जान से मारने की नीयत से शिकायतकर्ता के माथे पर तलवार से वार किया; और आरोपी सिमरन सिंह ने शिकायतकर्ता के कंधे पर तलवार से वार किया। कई अज्ञात साथियों ने भी कथित तौर पर लाठियों (डंडों) से उस समूह पर हमला किया और चिल्लाते हुए कहा कि उन्हें शिकायतकर्ता बिना हथियार के मिल गया और वे उसे मार डालेंगे। शिकायतकर्ता कथित तौर पर बेहोश हो गया और अगले दिन ही उसे होश आया।

एडिशनल सेशंस जज ने याचिकाकर्ताओं के खिलाफ IPC की धारा 307, 323, 324, 34 और 506 (जो BNS, 2023 की धारा 109, 115(2), 118(1), 3(5) और 351(2) के बराबर हैं) और आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25 के तहत आरोप तय किए।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप से बरी होने की मांग करते हुए यह रिविज़न याचिका दायर की।

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