पंजाब एंड हरियाणा हाइकोर्ट ने NDPS Act के तहत दर्ज मामले में आरोपी को मानवीय आधार पर छह सप्ताह की अंतरिम जमानत प्रदान की। अदालत ने आरोपी की पत्नी द्वारा हाल ही में बच्ची को जन्म देने और प्रसवोत्तर अवधि में पति के सहयोग की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए यह राहत दी।

जस्टिस संजय वशिष्ठ ने कहा कि याचिकाकर्ता की पत्नी पहले गर्भवती थी और 5 जनवरी, 2026 को उसने एक बच्ची को जन्म दिया। ऐसे समय में पत्नी को अपने सबसे करीबी सहचर, यानी पति की आवश्यकता होती है। अदालत ने यह भी कहा कि मां और नवजात शिशु दोनों के स्वास्थ्य और देखभाल के लिए विशेष ध्यान की जरूरत होती है।

यह याचिका अजय कुमार द्वारा दायर की गई, जो FIR नंबर 180 दिनांक 22 सितंबर 2025 के तहत NDPS Act की धारा 22 में नामजद है। याचिकाकर्ता ने दो महीने की अंतरिम जमानत की मांग की। उसका कहना था कि याचिका दाखिल करते समय उसकी पत्नी गर्भावस्था की अंतिम अवस्था में थी और बाद में उसने बच्चे को जन्म दिया।

राज्य सरकार ने जमानत का विरोध करते हुए बताया कि आरोपी के पास से 1,12,000 ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड टैबलेट्स बरामद की गईं और वह कथित तौर पर एक बड़े नशा तस्करी गिरोह का हिस्सा है। यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता की पत्नी की देखभाल उसके ससुराल और मायके वाले कर रहे हैं तथा जमानत मिलने पर आरोपी के फरार होने की आशंका है।

दोनों पक्षकारों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद हाइकोर्ट ने पाया कि इस तथ्य पर कोई विवाद नहीं है कि याचिकाकर्ता की पत्नी ने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया। अदालत ने मामले के गुण-दोष में गए बिना यह माना कि मानवीय दृष्टिकोण से याचिकाकर्ता को सीमित अवधि के लिए राहत दी जानी चाहिए।

हाइकोर्ट ने आरोपी को छह सप्ताह की अंतरिम जमानत प्रदान की, जो कि राष्ट्रीयकृत बैंक की ओर से ₹5 लाख की FDR के रूप में बैंक गारंटी जमा करने की शर्त पर दी गई।

Tags: