तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने “₹600 करोड़ घोषित किए, ₹30 करोड़ छूट गए तो क्या चुनाव रद्द होगा?” मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने बुधवार (7 अक्टूबर) को सवाल किया कि यदि तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने चुनावी हलफनामे में करीब ₹600 करोड़ की संपत्ति घोषित की है, लेकिन कथित तौर पर करीब ₹30 करोड़ की संपत्तियों का खुलासा नहीं किया, तो क्या इसे भ्रष्ट आचरण (Corrupt Practice) माना जा सकता है और क्या इसके आधार पर उनका चुनाव रद्द किया जा सकता है?
जस्टिस वी. लक्ष्मीनारायणन ने यह सवाल मुख्यमंत्री द्वारा दायर उस आवेदन पर सुनवाई के दौरान उठाया, जिसमें उन्होंने पेरम्बूर विधानसभा क्षेत्र से अपने चुनाव को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका को खारिज करने की मांग की है।
क्या है मामला?
मतदाता एस. दिनेश ने विजय के पेरम्बूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतने को मद्रास हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विजय ने अपने चुनावी हलफनामे में अपनी वित्तीय संपत्तियों से जुड़ी कुछ जानकारियों का सही तरीके से खुलासा नहीं किया।
इसी चुनाव याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए विजय की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने दलीलें पेश कीं।
कोर्ट ने ₹30 करोड़ की संपत्ति को लेकर क्या पूछा?
सुनवाई के दौरान जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने सवाल किया कि अगर विजय ने करीब ₹600 करोड़ की संपत्ति पहले ही घोषित कर रखी थी, तो उसमें से ₹30 करोड़ की संपत्ति का खुलासा न करना क्या चुनाव को रद्द करने के लिए पर्याप्त आधार हो सकता है?
कोर्ट ने पूछा—
“उन्होंने ₹600 करोड़ की संपत्ति घोषित की है। क्या ₹30 करोड़ की संपत्ति का छूट जाना भ्रष्ट आचरण माना जा सकता है?”
जज ने यह भी सवाल किया कि क्या इस तरह की कथित चूक से चुनाव परिणाम पर वास्तव में कोई प्रभाव पड़ा?
क्या मतदाता के फैसले पर असर पड़ा?
कोर्ट ने चुनाव याचिकाकर्ता से यह भी सवाल किया कि यदि ₹30 करोड़ की संपत्ति का खुलासा नहीं किया गया, तो क्या इससे पेरम्बूर के मतदाता के मतदान के फैसले पर कोई फर्क पड़ता?
जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई मतदाता पहले ही विजय को वोट देने का निर्णय कर चुका है, तो क्या इससे उसे कोई फर्क पड़ेगा कि विजय के पास कितनी अतिरिक्त संपत्ति है।
कोर्ट ने पूछा—
“अगर मैंने विजय को वोट देने का फैसला कर लिया है, तो इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा कि उनके पास कौन-सी संपत्ति है। क्या आपको लगता है कि ₹30 करोड़ की संपत्ति का खुलासा न करने से पेरम्बूर के मतदाता के फैसले पर कोई फर्क पड़ता?”
'क्या विजय ने खुद संपत्ति की सूची तैयार की?'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि विजय जैसे लोकप्रिय अभिनेता के नाम पर बड़ी संख्या में संपत्तियां होना संभव है।
जज ने कहा कि यह जरूरी नहीं कि विजय ने खुद बैठकर अपनी सभी संपत्तियों की सूची तैयार की हो। संभव है कि उन्होंने अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) पर भरोसा किया हो।
जस्टिस लक्ष्मीनारायणन ने अपने अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा—
“जब आप जज बनते हैं तो आपको अपनी संपत्ति घोषित करनी होती है। क्या आपको लगता है कि मैंने बैठकर सूची तैयार की? मैंने अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट पर भरोसा किया। इसी तरह क्या विजय ने खुद बैठकर अपनी सभी संपत्तियां लिखी होंगी?”
कोर्ट ने सवाल किया कि अगर CA से कुछ संपत्तियां घोषित करने में चूक हो गई हो, तो क्या केवल इसी आधार पर चुनाव रद्द किया जा सकता है?
विजय की ओर से क्या दलील दी गई?
विजय की ओर से सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि चुनाव याचिका में आवश्यक material particulars का पर्याप्त रूप से उल्लेख नहीं किया गया है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या याचिकाकर्ता ने Representation of the People Act की धारा 81 की आवश्यकताओं को पूरा किया है और क्या याचिका में यह पर्याप्त रूप से बताया गया है कि वह संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता है।
विजय की ओर से यह भी दलील दी गई कि चुनावी हलफनामे में छोटी-मोटी विसंगतियां अपने आप में चुनाव रद्द करने का आधार नहीं हो सकतीं।
इसके लिए यह दिखाना आवश्यक होगा कि कथित विसंगति का चुनाव परिणाम पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है।
चुनाव याचिका पर फैसला अभी नहीं
मद्रास हाईकोर्ट फिलहाल इस बात पर सुनवाई कर रहा है कि चुनाव याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज किया जाए या नहीं।
इस सुनवाई के दौरान कोर्ट ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया कि ₹600 करोड़ की घोषित संपत्ति के मुकाबले ₹30 करोड़ की संपत्ति का कथित गैर-प्रकटीकरण क्या वास्तव में 'भ्रष्ट आचरण' के स्तर तक पहुंचता है और क्या इससे चुनाव परिणाम प्रभावित हुआ।
मामले में अंतिम निर्णय अभी नहीं हुआ है।