आपराधिक मामलों का खुलासा न करने पर Congress MLA ​​का चुनाव रद्द, हाईकोर्ट ने BJP उम्मीदवार को किया विजयी घोषित

Update: 2026-03-10 04:22 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों का खुलासा न करने के आधार पर कांग्रेस विधायक (Congress MLA) मुकेश मल्होत्रा ​​का चुनाव रद्द किया। कोर्ट ने माना कि आपराधिक पृष्ठभूमि को छिपाना या उसका अधूरा खुलासा करना एक महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाने के बराबर है और इससे चुनाव रद्द हो जाता है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि महत्वपूर्ण जानकारी को छिपाने से चुनावी अधिकारों के स्वतंत्र प्रयोग में बाधा उत्पन्न होती है, जिससे मतदाताओं को सोच-समझकर चुनाव करने के अवसर से वंचित होना पड़ता है और मतदाताओं के मतदान के अधिकार के स्वतंत्र प्रयोग में हस्तक्षेप होता है।

जस्टिस जी. एस. अहलूवालिया रामनिवास रावत द्वारा दायर एक चुनाव याचिका पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में विधानसभा क्षेत्र संख्या 02, विजयपुर (जिला श्योपुर) से मुकेश मल्होत्रा ​​के चुनाव को चुनौती दी गई। रावत ने BJP उम्मीदवार के तौर पर उपचुनाव लड़ा था। उन्होंने मांग की थी कि मल्होत्रा ​​के चुनाव को अमान्य घोषित किया जाए और उन्हें (रावत को) विधिवत निर्वाचित उम्मीदवार घोषित किया जाए।

यह उपचुनाव तब हुआ जब रावत, जो पहले 2023 के आम चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर मध्य प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए, ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया और बाद में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए, जिसके परिणामस्वरूप विजयपुर सीट खाली हो गई। चुनाव आयोग ने उपचुनाव की घोषणा की; 13 नवंबर 2024 को मतदान हुआ और 23 नवंबर 2024 को परिणाम घोषित किए गए, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के मुकेश मल्होत्रा ​​को विजयी घोषित किया गया।

चुनाव याचिका मुख्य रूप से इस आरोप पर आधारित थी कि मल्होत्रा ​​ने नामांकन पत्रों के साथ फॉर्म-26 में जमा किए जाने वाले हलफनामे में अपनी आपराधिक पृष्ठभूमि का पूरी तरह से खुलासा नहीं किया। याचिकाकर्ता के अनुसार, मल्होत्रा ​​के खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज है। हालांकि, अपने हलफनामे में उन्होंने दो लंबित आपराधिक मामलों के बारे में अधूरी जानकारी दी थी और चार अन्य मामलों का तो बिल्कुल भी ज़िक्र नहीं किया।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि आरोप तय करने का चरण (Stage of framing a charge) केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि वास्तव में यह वह चरण है जहाँ न्यायिक विवेक का उपयोग यह पता लगाने के लिए किया जाता है कि क्या आरोपी के खिलाफ एकत्र की गई सामग्री प्रथम दृष्टया (Prima Facie) कोई गंभीर संदेह उत्पन्न करती है कि आरोपी ने कोई ऐसा अपराध किया, जिसके लिए उस पर मुकदमा चलाया जाना आवश्यक है या नहीं। इस उद्देश्य के लिए कोर्ट के पास साक्ष्यों का मूल्यांकन करने की शक्ति होती है। अदालत ने फैसला सुनाया कि नामांकन पत्रों के साथ दायर हलफनामे में आपराधिक मामलों की अधूरी जानकारी देना, मतदाताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के बराबर है।

अदालत ने टिप्पणी की,

"लंबित मामलों की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी न देना, अपने आप में एक महत्वपूर्ण तथ्य को छिपाने के बराबर होगा, जिसके परिणामस्वरूप इसे एक भ्रष्ट आचरण माना जाएगा।"

अदालत ने इस बात पर ज़ोर दिया कि प्रतिवादी नंबर 1 यह साबित करने में विफल रहा कि उसके द्वारा आरोपों के तय न होने के संबंध में की गई गलत घोषणा उसकी एक वास्तविक (Bona Fide) भूल थी। इसलिए अदालत ने फैसला सुनाया कि प्रतिवादी नंबर 1 ने आरोपों के तय होने से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी को जान-बूझकर और सचेत रूप से छिपाकर मतदाताओं को गुमराह किया है; जिसके परिणामस्वरूप मतदाताओं के मतदान के अधिकार के स्वतंत्र प्रयोग में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हस्तक्षेप हुआ है।

तदनुसार, हाईकोर्ट ने विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से मुकेश मल्होत्रा ​​के चुनाव को अमान्य घोषित किया। साथ ही इस बात को ध्यान में रखते हुए कि याचिकाकर्ता को दूसरे सबसे अधिक वोट मिले थे, रामनिवास रावत को उक्त निर्वाचन क्षेत्र से विधिवत निर्वाचित विधानसभा सदस्य घोषित किया।

Case Title: Ramniwas Rawat v. Mukesh Malhotra & Ors. (Election Petition No. 24 of 2024)

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