'बच्चों को प्रतिबंधित दवा लिखी': कोल्ड्रिफ़ कफ सिरप से हुई मौतों के मामले में आरोपी डॉक्टर को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने किया ज़मानत देने से इनकार

Update: 2026-06-06 15:58 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक डॉक्टर को ज़मानत देने से इनकार किया, जिस पर मिलावटी कफ सिरप से कई बच्चों की मौत के मामले में केस दर्ज किया गया था।

जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की बेंच ने कहा,

"आवेदक बच्चों के डॉक्टर (बाल रोग विशेषज्ञ) हैं। उन्होंने 4 साल से कम उम्र के बच्चों को एक निश्चित डोज़ वाला कंपाउंड (दवा) लिखा, जिस पर सरकार ने 18.12.2023 को जारी सर्कुलर के ज़रिए प्रतिबंध लगा दिया था। इसके कारण कई मासूम बच्चों की मौत हो गई और इस कफ सिरप से बड़े पैमाने पर लोगों की सेहत को नुकसान पहुंचा।"

बेंच ने फरवरी 2026 में डॉ. प्रवीण सोनी और कुछ फार्मासिस्टों को ज़मानत देने से इनकार किया, जो बच्चों को कोल्ड्रिफ़ कफ सिरप लिखने और बेचने के लिए ज़िम्मेदार थे, जिसके कारण 30 बच्चों की मौत हो गई थी।

जांच के अनुसार, 'कोल्ड्रिफ़' कफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) की मात्रा खतरनाक रूप से ज़्यादा थी, जो तय सीमा से कहीं अधिक थी। यह पदार्थ ज़हरीला माना जाता है और इससे खासकर बच्चों में किडनी फेलियर (गुर्दे खराब होना) हो सकता है। इसलिए सरकार ने 18 दिसंबर 2023 के सर्कुलर के ज़रिए 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इस सिरप को लिखने या बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया था।

आवेदक के सीनियर वकील ने तर्क दिया कि वे 45 साल से ज़्यादा के अनुभव वाले सम्मानित बाल रोग विशेषज्ञ हैं और उन्हें इस मामले में झूठा फंसाया गया। सीनियर वकील ने तर्क दिया कि उन्होंने अच्छी नीयत से कफ सिरप लिखा था और उन्हें इसमें मिलावट की जानकारी नहीं थी। उन्होंने आगे तर्क दिया कि दवा के निर्माण, वितरण या टेस्टिंग में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

आवेदक के सीनियर वकील ने यह भी तर्क दिया कि सिरप में इस्तेमाल किए गए तत्वों के कॉम्बिनेशन पर आधिकारिक तौर पर कोई प्रतिबंध नहीं था। उन्होंने आगे तर्क दिया कि मौतें दवा में मिलावट के कारण हुईं, न कि उसके तय कंपोजीशन (बनावट) के कारण।

राज्य सरकार ने ज़मानत याचिका का विरोध करते हुए कहा कि डॉक्टर ने सरकारी प्रतिबंधों के बावजूद 4 साल से कम उम्र के बच्चों को निश्चित डोज़ वाले कॉम्बिनेशन वाली दवा लिखी थी। राज्य सरकार ने तर्क दिया कि मेडिकल कम्युनिटी को पहले से ही पता था कि उस इलाके में बच्चों को किडनी की समस्या हो रही है। कोर्ट ने देखा कि याचिकाकर्ता, जो एक बच्चों का डॉक्टर (पीडियाट्रिशियन) है, ने दवाओं का एक ऐसा कॉम्बिनेशन लिखा था, जिस पर सरकार ने 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए रोक लगा रखी थी। कोर्ट ने यह भी देखा कि इस मामले में लोगों की सेहत को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचा और कई बच्चों की मौत हुई।

बेंच ने यह भी पाया कि मेडिकल एक्सपर्ट्स की राय के अनुसार, दवाओं के इस कॉम्बिनेशन को छोटे बच्चों को नहीं दिया जाना चाहिए। इन बातों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने माना कि ज़मानत नहीं दी जा सकती। इसलिए बेंच ने ज़मानत की अर्ज़ी खारिज की।

इससे पहले, नवंबर 2025 में हाई कोर्ट ने 'कोल्ड्रिफ़' (Coldrif) कफ सिरप के डिस्ट्रीब्यूटर की अपील खारिज की थी। उसने अपनी दुकान सील करने और ड्रग लाइसेंस रद्द करने के फ़ैसले को चुनौती दी थी। कोर्ट ने इस मामले को 'मेडिकल इतिहास का सबसे चौंकाने वाला मामला' बताया था।

इसके अलावा, अक्टूबर 2025 में छिंदवाड़ा कोर्ट ने डॉक्टर प्रवीण सोनी की ज़मानत अर्ज़ी भी खारिज की थी।

Case Title: Dr SS Thakur v State of Madhya Pradesh, MCRC-17066-2026

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