फिल्म के वित्तीय समझौते के कथित उल्लंघन मामले में निर्माता को अग्रिम जमानत, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने दी राहत

Update: 2026-06-08 14:15 GMT

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने फिल्म "लकी" के निर्माता को वित्तीय समझौते के कथित उल्लंघन से जुड़े आपराधिक मामले में अग्रिम जमानत प्रदान की। अदालत ने माना कि मामले में आरोपी की हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता नहीं है और वह निवेशक की पूरी राशि जमा कराने के लिए भी तैयार है।

जस्टिस गजेंद्र सिंह की एकल पीठ ने कहा,

"मामले के समग्र तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए तथा इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि जांच के लिए आवेदक की हिरासत आवश्यक नहीं है और वह पूरी राशि जमा कराने के लिए तैयार है, यह अग्रिम जमानत देने का उपयुक्त मामला है।"

मामला एक हिंदी फीचर फिल्म के निर्माण से जुड़ा है, जिसका नाम पहले "कोला कोला" था और बाद में इसे "लकी" नाम दिया गया। फिल्म में एक्ट्रेस सनी लियोनी के साथ कई अन्य कलाकारों ने अभिनय किया।

आवेदक एक निर्माण साझेदारी फर्म का भागीदार और फिल्म निर्माता है। उसके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 406 (आपराधिक न्यासभंग), धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) और धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया गया।

निर्माता का कहना था कि फिल्म के निर्माण को पूरा करने के लिए शिकायतकर्ता संजय बिंदल ने 15 सितंबर 2019 के एक समझौते के तहत 52 लाख रुपये का निवेश किया। साथ ही फिल्म के संबंध में एक अन्य समझौता भी किया गया और फिल्म का निर्माण पूरा होने के बाद उसे आवश्यक प्रमाणन भी प्राप्त हो गया।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते की एक शर्त के अनुसार निवेशक की पूरी राशि लौटाए बिना फिल्म का प्रचार, ट्रेलर, पोस्टर या गीत किसी भी माध्यम से जारी नहीं किया जा सकता था।

इसके बावजूद फिल्म का एक गीत एक संगीत मंच के माध्यम से जारी कर दिया गया, जो समझौते का उल्लंघन है।

निर्माता की ओर से अदालत को बताया गया कि वह 52 लाख रुपये की राशि जमा कराने के लिए तैयार है। साथ ही यह भी कहा गया कि उसे झूठा फंसाया गया और मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ की कोई आवश्यकता नहीं है।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि जांच के लिए हिरासत जरूरी नहीं है। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि आवेदक विवादित राशि जमा कराने को तैयार है।

इसी आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली। आदेश के अनुसार, गिरफ्तारी की स्थिति में आवेदक को 50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाएगा।

हालांकि हाईकोर्ट ने मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना यह राहत प्रदान की और आपराधिक मामले की आगे की कार्यवाही कानून के अनुसार जारी रहेगी।

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