मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि माँ के चरित्र पर केवल आरोप लगाने के आधार पर, बच्चे को उसकी कस्टडी से वापस लाने के लिए CrPC की धारा 97 के तहत सर्च वारंट जारी करना उचित नहीं है। [2026 LiveLaw (MP) 431]

बता दें, CrPC की धारा 97 के तहत जिला मजिस्ट्रेट, उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) या प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट को किसी ऐसे व्यक्ति को छुड़ाने के लिए सर्च वारंट जारी करने का अधिकार है, जिसे गलत तरीके से कैद (wrongful confinement) में रखा गया हो।

जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की पीठ ने कहा,

"केवल यह आरोप लगाना कि माँ का आचरण या चरित्र ठीक नहीं है, इस नतीजे पर पहुँचने के लिए काफी नहीं है कि नाबालिग बच्चा CrPC की धारा 97 के अर्थ में 'गलत तरीके से कैद' (Wrongful Confinement) में है।"

यह याचिका बच्चे की दादी (पिता की ओर से) ने दायर की थी। उन्होंने 8 दिसंबर 2017 को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge) द्वारा दिए गए उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें CrPC की धारा 97 के तहत उनकी अर्जी को 'सुनवाई योग्य न मानते हुए' (Not Maintainable) खारिज कर दिया गया।

दादी के वकील ने तर्क दिया कि माँ किसी अन्य पुरुष के साथ रह रही है और बच्चा भी उसी के पास है; दादी ही बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाती हैं। जब पिता को पता चला कि बच्चे के साथ बुरा बर्ताव (Cruelty) हो रहा है, तो वह बच्चे से मिलने गए, लेकिन माँ ने उन्हें मिलने नहीं दिया। इसके बाद दादी ने संबंधित पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।

इसके बाद दादी ने सीहोर जिले के SDM के समक्ष CrPC की धारा 97 के तहत एक अर्जी दायर की, जिसे खारिज कर दिया गया। इसके बाद दादी ने रिविजनल कोर्ट (Revisional Court) का दरवाजा खटखटाया, लेकिन वहां से भी उनकी अर्जी खारिज कर दी गई।

प्रतिवादी (माँ) के वकील ने तर्क दिया कि माँ ही बच्चे की प्राकृतिक और कानूनी अभिभावक (Natural and Legal Guardian) है, इसलिए बच्चे को वापस लाने के लिए सर्च वारंट जारी नहीं किया जा सकता।

अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के उन मामलों का हवाला दिया जिनमें ऐसे ही मुद्दों पर चर्चा की गई। अदालत ने पाया कि बच्चा अपनी माँ के साथ रह रहा है, जो उसकी कानूनी और प्राकृतिक अभिभावक है।

बेंच ने इस बात पर जोर दिया,

"नाबालिग बच्चा/प्रतिवादी संख्या 2 अपनी माँ/प्रतिवादी संख्या 1 के साथ रह रहा है। रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है, जिससे यह पता चले कि किसी सक्षम न्यायालय ने माँ/प्रतिवादी संख्या 1 को नाबालिग बच्चे की कस्टडी रखने के लिए अयोग्य घोषित किया हो या किसी अन्य कारण से उसे कस्टडी का अधिकार न दिया हो। साथ ही किसी भी सक्षम न्यायालय का ऐसा कोई आदेश भी नहीं है जिसमें यह कहा गया हो कि नाबालिग बच्चे/प्रतिवादी संख्या 2 की कस्टडी माँ के पास नहीं रहनी चाहिए।"

इस प्रकार, अदालत ने याचिका खारिज की।

Case Title : MR v M

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