मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व कैबिनेट मंत्री के खिलाफ दर्ज अश्लीलता और जानबूझकर अपमान करने के आरोप वाली FIR की रद्द
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक पूर्व कैबिनेट मंत्री के खिलाफ दर्ज अश्लीलता और जानबूझकर अपमान करने के आरोप वाली FIR रद्द की। कोर्ट ने कहा कि "नालायक" शब्द आम बोलचाल में अक्सर इस्तेमाल होता है और यह शब्द अपने आप में भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत किसी अपराध के लिए कानूनी जवाबदेही नहीं बनाता है।
जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच ने यह फैसला सुनाया:
"यह आम अनुभव की बात है कि 'नालायक' जैसे शब्द और इसी तरह के बोलचाल वाले शब्द पूरे देश में आम बातचीत में खूब इस्तेमाल होते हैं। संदर्भ के आधार पर, यह ज़रूरी नहीं कि इन शब्दों का मकसद किसी खास व्यक्ति को अपमानित करना या गाली देना हो। सिर्फ़ ऐसे शब्दों के आधार पर किसी पर आपराधिक जवाबदेही नहीं थोपी जा सकती, जब तक कि अपराध के लिए ज़रूरी कानूनी तत्व साफ तौर पर साबित न हो जाएं।"
एक याचिका दायर की गई, जिसमें IPC की धारा 294 (सार्वजनिक स्थानों पर अश्लील हरकतें और गाने) और धारा 504 (जानबूझकर अपमान करना) के तहत दर्ज चार्जशीट रद्द करने की मांग की गई। साथ ही सिंगरौली के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही को भी रद्द करने की मांग की गई।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 23 जुलाई 2021 को इंडियन नेशनल कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई के खिलाफ विरोध रैली का आयोजन किया। आरोप लगाया गया कि जब कलेक्ट्रेट के पास जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जा रहा था तो याचिकाकर्ता (जो एक पूर्व कैबिनेट मंत्री हैं) ने कलेक्टर और जिला प्रशासन के खिलाफ अनुचित और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया।
इसके बाद सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट के निर्देश पर एक FIR दर्ज की गई और जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि धारा 294 और 504 के लिए ज़रूरी तत्व इस मामले में मौजूद नहीं थे। वकील ने यह भी कहा कि FIR में उन सटीक अपमानजनक शब्दों का ज़िक्र नहीं किया गया, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर याचिकाकर्ता ने किया। याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी तर्क दिया कि कथित शब्दों का इस्तेमाल सार्वजनिक विरोध के संदर्भ में जिला प्रशासन के कामकाज के खिलाफ किया गया।
कोर्ट ने कहा कि धारा 294 सार्वजनिक स्थान पर की गई ऐसी अश्लील हरकतों या बातों के लिए सज़ा का प्रावधान करती है, जिनसे दूसरों को परेशानी होती हो। इस मामले में कोर्ट ने कहा कि इस्तेमाल किया गया अपमानजनक शब्द कुछ संदर्भों में अपमानजनक माना जा सकता है, लेकिन इसे अपने आप अश्लील शब्द की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। बेंच ने कहा कि 'नालायक' जैसे शब्द रोज़मर्रा की बातचीत में आम तौर पर इस्तेमाल होते हैं और संदर्भ के हिसाब से अपमानजनक हो सकते हैं, लेकिन ज़रूरी नहीं कि उनका मकसद किसी खास व्यक्ति को नीचा दिखाना या गाली देना हो।
कोर्ट ने आगे कहा कि कथित टिप्पणियां एक राजनीतिक रैली के दौरान की गई थीं और कथित तौर पर प्रशासन के कामकाज के खिलाफ थीं।
बेंच ने आगे कहा,
"किसी राजनीतिक विरोध के दौरान किसी प्रशासनिक अधिकारी की सिर्फ़ आलोचना करना या उसके खिलाफ़ कड़े शब्दों का इस्तेमाल करना—अगर शांति भंग करने के इरादे से जान-बूझकर उकसाने का कोई सबूत न हो—तो इसे IPC की धारा 504 के तहत अपराध नहीं माना जाएगा।"
बेंच ने पाया कि कथित घटना सार्वजनिक जगह पर होने के बावजूद, अभियोजन पक्ष ने अपने मामले में किसी स्वतंत्र गवाह का ज़िक्र नहीं किया। यह भी पाया गया कि FIR एक पटवारी ने सब-डिविज़नल अधिकारी के निर्देश पर दर्ज कराई।
इसलिए कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि याचिकाकर्ता पर लगाए गए आरोपों से पहली नज़र में कथित अपराधों का होना साबित नहीं होता। इस तरह याचिका मंज़ूर कर ली गई और FIR रद्द की गई।
Case Title: Bansh Mani Verma v State of Madhya Pradesh [MCRC-55648-2024]