2025 में 54 बाघों की मौत: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शिकार रोकने के निर्देश मांगने वाली PIL पर नोटिस जारी किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मंगलवार (20 जनवरी) को एक PIL पर केंद्र सरकार, राज्य सरकार और नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी को नोटिस जारी किया। इस PIL में राज्य में बाघों की मौत और शिकार की घटनाओं में खतरनाक बढ़ोतरी पर चिंता जताई गई।
चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सर्राफ की डिवीजन बेंच ने कहा,
"नोटिस जारी करें। प्रतिवादी नंबर 1 और 3 की ओर से पेश हुए वकील ने नोटिस स्वीकार कर लिया है।"
यह PIL पर्यावरण एक्शन ग्रुप 'प्रयत्न' के सचिव और संस्थापक सदस्य अजय दुबे ने दायर की। इसमें कहा गया कि 785 बाघों में से अकेले 2025 में ही 54 बाघों की मौत हो गई।
यह याचिका 16 दिसंबर की NDTV की रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें कहा गया कि कई बाघ 'रहस्यमय और अक्सर संदिग्ध परिस्थितियों' में मर रहे हैं, जिससे सुरक्षा, कानून लागू करने और जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
याचिका में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के आधिकारिक डेटा का भी हवाला दिया गया, जिसमें दिखाया गया कि लगभग 57% बाघों की मौत अप्राकृतिक कारणों से हुई, जिसमें शिकार, बिजली का झटका या अज्ञात परिस्थितियां शामिल हैं।
अधिकारियों के बार-बार आश्वासन के बावजूद, याचिका में आरोप लगाया गया कि संरक्षित वन क्षेत्रों के अंदर शिकारी मौजूद हैं, जो लगातार एक गंभीर खतरा बने हुए हैं।
याचिका में कहा गया कि जहां वन अधिकारी अक्सर बाघों की मौत का कारण क्षेत्रीय लड़ाई बताते हैं, वहीं वन्यजीव विशेषज्ञ इस दावे का पुरजोर खंडन करते हैं।
याचिका में आगे कहा गया कि विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकट सिर्फ बाघों तक ही सीमित नहीं है और तेंदुओं की मौतें भी बढ़ रही हैं। आरोप लगाया गया कि शिकारी रिजर्व के अंदर बिजली के तारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो वन विभाग की निगरानी और खुफिया उपायों में गंभीर विफलताओं का संकेत देता है।
याचिका में एक खास घटना का जिक्र किया गया, जिसमें बुधनी-मिडघाट रेलवे लाइन पर एक तेज रफ्तार ट्रेन से एक वयस्क नर बाघ कुचल गया था। कथित तौर पर इस हिस्से को बार-बार होने वाली मौतों के कारण 'मौत का ट्रैक' कहा जाता है। यह रेलवे लाइन रातापानी टाइगर रिजर्व के मुख्य क्षेत्र से होकर गुजरती है।
याचिका में आरोप लगाया गया कि रेलवे विभाग और वन विभाग के बीच जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डाली जा रही है, जबकि अंडरपास और ओवरपास के निर्माण सहित महत्वपूर्ण विशेषज्ञ सिफारिशों को लागू नहीं किया गया। इन सिफारिशों का पालन न करने के कारण कथित तौर पर वन्यजीवों से जुड़े बार-बार हादसे हुए हैं। याचिका में 12 दिसंबर, 2025 को प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर द्वारा जारी एक लेटर का भी ज़िक्र किया गया, जिसमें अधिकारियों ने माना था कि बाघों और दूसरे जानवरों की मौत बिजली के झटके, सड़क हादसों और रेल हादसों से हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, लेटर में यह भी माना गया कि संबंधित अधिकारियों और फील्ड अफसरों की लापरवाही के कारण बाघों की मौतें लगातार हो रही हैं।
याचिकाकर्ता ने प्रतिवादी अधिकारियों से ये निर्देश देने की मांग की:
- शिकार रोकने के लिए तुरंत और असरदार कदम उठाए जाएं।
- एक्सपर्ट की सिफारिशों को लागू किया जाए और सभी संबंधित अधिकारियों के बीच तालमेल बनाया जाए।
- बाघों के संरक्षण के लिए व्यापक उपाय किए जाएं।
- बुधनी-मिडघाट रेलवे लाइन के साथ ओवरपास और अंडरपास बनाए जाएं।
यह मामला वन विभाग के एक रिटायर्ड रेंजर द्वारा दायर एक और PIL से जुड़ा था, जिसमें आरोप लगाया गया कि वन अधिकारियों ने अनियमितताएं की हैं। रिटायर्ड रेंजर रामलाल कोर्ट में मौजूद थे और उन्हें संरक्षण उपायों पर सुझाव देने का निर्देश दिया गया, जिन्हें अपनाया जा सकता है।
मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को तय की गई।
Case Title: Ajay Dubey v Union of India [WP 12 of 2026]