तकनीकी आधार पर परेशान नहीं किया जा सकता: एमपी हाइकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी के मूल दस्तावेज लौटाने का आदेश दिया

Update: 2026-03-02 11:16 GMT

मध्य प्रदेश हाइकोर्ट ने NEET-PG अभ्यर्थी के मूल प्रमाणपत्र रोके जाने पर सख्त रुख अपनाते हुए चिकित्सा शिक्षा निदेशक को दस्तावेज तत्काल लौटाने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि जब मूल दस्तावेज प्राधिकरण के पास ही हैं तो मात्र तकनीकी आधार पर अभ्यर्थी को परेशान नहीं किया जा सकता।

जस्टिस जय कुमार पिल्लई ने कहा,

“यह निर्विवाद है कि मूल दस्तावेज प्रतिवादी क्रमांक 2 अर्थात मेडिकल शिक्षा निदेशक के पास हैं। जब उन्हें यह ज्ञात था कि दस्तावेज उनके पास हैं तो साधारण तकनीकी कारणों से याचिकाकर्ता को प्रताड़ित कर अवमानना याचिका दायर करने की स्थिति में नहीं डाला जाना चाहिए था।”

मामला अनुसूचित जनजाति वर्ग के एक MBBS ग्रैजुएट स्नातक से जुड़ा है, जिसने वर्ष 2020 में NEET-PG परीक्षा में अखिल भारतीय रैंक 79,171 प्राप्त की थी। उसे द्वितीय चरण की काउंसलिंग में एक शासकीय मेडिकल कॉलेज में सीट आवंटित हुई और उसने जुलाई 2020 में पाठ्यक्रम जॉइन किया। बाद में उसने कथित रैगिंग, पक्षपात और भाई-भतीजावाद के कारण पाठ्यक्रम बीच में छोड़ दिया।

कॉलेज प्रशासन ने उसके मूल दस्तावेज रोक लिए और राज्य कोटे की सीट छोड़ने पर 30 लाख रुपये की बांड राशि की मांग की।

याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि जब कई पोस्ट ग्रैजुएट सीटें रिक्त पड़ी है तब इतनी भारी बांड राशि अनुचित है।

साथ ही संसद में 9 फरवरी 2024 को हुई चर्चा का हवाला देते हुए कहा गया कि राष्ट्रीय मेडिकल आयोग ने राज्यों को कठोर बांड नीतियों की समीक्षा करने की सलाह दी है।

याचिका में यह भी बताया गया कि अभ्यर्थी ने 8 अगस्त 2024 को जारी विज्ञापन के तहत मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा घोषित मेडिकल अधिकारी पद के लिए पात्रता हासिल की। उसे 20 जनवरी, 2026 को स्वीकृति प्राप्त हुई और 5 मार्च, 2026 को इंटरव्यू निर्धारित था, जिसके लिए 23 फरवरी 2026 तक मूल दस्तावेज जमा करना अनिवार्य था।

इससे पूर्व संबंधित प्रकरण में हाइकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए मूल दस्तावेज जारी करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद अनुपालन न होने पर याचिकाकर्ता ने अवमानना याचिका दायर की।

मामले की सुनवाई करते हुए अदालत ने मेडिकल शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया कि वे 2 मार्च 2026 तक मूल दस्तावेज लौटा दें अन्यथा आगे अवमानना कार्यवाही की जाएगी।

मामले की अगली सुनवाई 9 मार्च, 2026 को होगी।

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