निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट 1881 भाग 29: लिखत के अनादर की सूचना का युक्तियुक्त समय

Update: 2021-09-28 04:15 GMT

परक्राम्य लिखत अधिनियम 1881 (Negotiable Instruments Act, 1881) के अंतर्गत वचन पत्र और विनिमय पत्र के अनादर की सूचना से संबंधित प्रावधानों को धारा 105, 106, 107 में समाविष्ट किया गया है। सूचना का भी एक युक्तियुक्त समय होता ऐसे समय को इन धाराओं में बांधा गया है और युक्तियुक्तता की कसौटी को रचा गया है। इस आलेख के अंतर्गत इससे ही संबंधित निम्न धाराओं से संबंधित प्रावधानों पर प्रकाश डाला जा रहा है।

युक्तियुक्त समय की कसौटी-

धारा- 105:-

अधिनियम में प्रस्तुत की गई धारा के शब्द कुछ इस प्रकार है-

"युक्तियुक्त समय- प्रतिग्रहण या संदाय के उपस्थापन के लिए अनादर की सूचना देने की गणना करने में लोक अवकाश दिनों को अपवर्जित किया जाएगा। टिप्पण के लिए युक्तियुक्त समय कौन-सा है, यह अवधारण करने में लिखत की प्रकृति और वैसी ही लिखतों के बारे में व्यवहार की प्रायिक चर्या को ध्यान में रखा जाएगा, और ऐसे समय।"

"युक्तियुक्त समय" शब्दों का प्रयोग किया गया है। उदाहरण के लिए चेक का जारी किए जाने कि तिथि से युक्तियुक्त समय के अन्दर संदाय के लिए प्रस्थापित किया जाना, लिखतों के अनादर के तथ्य का टिप्पण सभी यहाँ पर निम्नलिखित तीन धाराएं हैं।

धारा 105 - युक्तियुक्त समय,

धारा 106- अनादर की सूचना युक्तियुक्त समय में देना, और

धारा 107- ऐसी सूचना के पारेषण के लिए युक्तियुक्त समय

युक्तियुक्त समय [ धारा 105] - धारा 105 में निम्नलिखित के सम्बन्ध में युक्तियुक्त समय का निर्धारण-

(i) संदाय का प्रतिग्रहण,

(ii) अनादर की सूचना देने,

(iii) अनादर का टिप्पण

(iv) अनादर का प्रसाक्ष्य, आदि

यह धारा उपबन्धित करती है कि युक्तियुक्त समय कौन सा है, का अवधारण करने में लिखत की प्रकृति और वैसे ही लिखतों के व्यवहार की प्रायिक चर्या को ध्यान में रखा जाएगा। इसके साथ ही साथ पक्षकारों की परिस्थितियाँ एवं हित और लिखत जहाँ रचा एवं लिखा गया है और जहाँ इसे प्रतिग्रहीता या संदाय होना है, के बीच की दूरी को ध्यान में रखा जाएगा।

युक्तियुक्त समय की गणना में लोक अवकाश के दिनों को अपवर्जित किया जाएगा।

विधि एवं तथ्य का मिश्रित प्रश्न युक्तियुक्त समय का प्रश्न विधि एवं तथ्य का मिश्रित प्रश्न है। जूरी तथ्यों को पाता है, जैसे कि पक्षकार एक दूसरे से कितनी दूरी पर रहते हैं, डाकखाने के दौरान, और मामले में प्रयोज्य अन्य सभी परिस्थितियाँ। परन्तु जब इन तथ्यों को निर्धारित कर लिया जाता है तो युक्तियुक्त समय विधि का प्रश्न बन जाता है जिसे न्यायालय न कि जूरी निर्धारित करेगा।

विधि का प्रश्न - मद्रास उच्च न्यायालय ने यह धारित किया है कि युक्तियुक्त समय के निर्धारण का प्रश्न तथ्य का प्रश्न है न कि विधि का यदि एक लेनदार एक देनदार से अन्य पक्षकार का चेक अभिप्राप्त करता है। लेनदार ऐसे चेक को युक्तियुक्त समय में उपस्थापित करेगा। अन्यथा देनदार अपनी आबद्धता से उन्मुक्त हो जाएगा

लार्ड एलेनबोरो के अनुसार-

"युक्तियुक्त समय के निर्धारण में अपनायी जाने वाली विधि सुविधा का नियम होगी और यह सुविधाजनक एवं युक्तियुक्त होगा कि चेक जो एक दिन के दौरान प्राप्त किया गया उसे दूसरे (अगले) दिन उपस्थापित किया जाय।"

धारा- 106:-

अधिनियम में प्रस्तुत किए गए शब्द-

अनादर की सूचना देने का युक्तियुक्त समय-यदि धारक और वह पक्षकार, जिसे अनादर की सूचना दी जाती है, यथास्थिति, विभिन्न स्थानों में कारबार करते हों या रहते हों, तो यदि ऐसी सूचना अगली डाक से या अनादर के दिन के पश्चात् अगले दिन भेज दी गई हो, तो वह युक्तियुक्त समय के अन्दर दी गई है।

यदि उक्त पक्षकार एक ही स्थान में कारबार करते हों, या रहते हों तो यदि ऐसी सूचना इतने समय में भेज दी गई हो कि वह अनादर के दिन के पश्चात् अगले दिन अपने गंतव्य स्थान पर पहुँच जाए तो वह युक्तियुक्त समय के अन्दर दी गई है।

अनादर की सूचना देने का युक्तियुक्त समय: [ धारा 106] धारा 106 में निम्नलिखित दो नियम उपबन्धित हैं :-

(1) धारा का प्रथम पैरा यह उपबन्धित करता है कि वह पक्षकार जिसे अनादर की सूचना दिया जाना है, वहाँ भिन्न स्थानों पर कारबार करता है, या रहता है वहाँ ऐसी सूचना युक्तियुक्त समय में दी जाएगी, यदि इसे अनादर के दिन से अगली डाक से या अगले दिन भेज दी गई है।

(2) धारा के दूसरे पैरा में दूसरे नियम को उपबन्धित किया गया है कि यदि उक्त पक्षकार एक ही स्थान में कारबार करते हों, या रहते हों तो यदि ऐसा सूचना इतने समय में भेज दी गई हो कि वह अनादर के दिन के पश्चात् अगले दिन अपने गंतव्य स्थान पर पहुंच जाएं, युक्तियुक्त समय होगा।

हैमिल्टन फाइनेन्स कं० लि० बनाम कानवरों में यह धारित किया गया है कि अनादर की सूचना के नियम से थोड़ा भी विचलन सम्बन्धी पक्षकार को भारी नुकसान कारित कर सकते हैं।" हुरी मोहन बनाम कृष्ण मोहन, के मामले में 10 माह का सूचना भेजने में 10 माह का विलम्ब युक्तियुक्त समय के अन्दर नहीं माना गया। इसी प्रकार बहादुर चन्द बनाम गुलाब राये में 27 दिन का विलम्ब युक्तियुक्त समय के अन्दर मान्य नहीं किया गया।

अंग्रेजी के एक दिलचस्प मामले में विनिमय पत्र के धारक को यह पता था कि इसे शोध्य तिथि पर अनादर किया जाएगा, अनादर की सूचना अपने अन्तरक को आगे की तिथि पर देय तिथि के पूर्व के दिन पर भेजा अन्तरक ने अनादर की सूचना को देय तिथि को प्रातः पाया और विनिमय पत्र वस्तुतः उस दिन अनादूत कर दिया गया। हाउस ऑफ लार्ड्स ने यह धारित किया कि ऐसी सूचना विधिमान्य थी, क्योंकि यहाँ कोई साक्ष्य नहीं था कि इसे अनादर के वास्तविक समय के पूर्व प्राप्त किया गया था।

धारा- 107:-

अधिनियम के शब्द-

ऐसी सूचना के पारेषण के लिए युक्तियुक्त समय-अनादर की सूचना पाने वाला जो पक्षकार किसी पूर्विक पक्षकार के विरुद्ध अपने अधिकार को प्रवृत्त करना चाहता है, यदि उसने उसकी प्राप्ति के पश्चात् उतने ही समय के अन्दर उसे पारेषित कर दिया हो, जितना सूचना देने के लिए उसे मिलता, यदि वह धारक होता, तो उसने सूचना युक्तियुक्त समय के अन्दर पारेषित कर दी हैं।

ऐसी सूचना के पारेषण के लिए युक्तियुक्त समय [ धारा 107 ] धारा 107 इस नियम को उपबन्धित करती है कि अनादर की सूचना पाने वाला व्यक्ति यदि अपने पूर्विक पक्षकार को अपने अधिकारों के प्रति आबद्ध करना चाहता है तो उसे उन्हें अनादर की सूचना देना आवश्यक होगा। सूचना के लोप की दशा में वह पूर्विक पक्षकार/पक्षकारों के विरुद्ध अधिकार को प्रवृत्त नहीं कर सकेगा।

यहाँ पर पूर्विक पक्षकार को सूचना देने का क्या युक्तियुक्त समय होगा? धारा 107 के अनुसार सूचना प्राप्त करने वाले व्यक्ति को जिसके द्वारा पूर्विक पक्षकार को सूचना पारेषित करने के लिए उतना ही समय मिलेगा, यदि वह धारक होता, तो उसने सूचना युक्तियुक्त समय के अन्दर पारेषित कर दी है।

रोवे बनाम टिप्पस के मामले में यह धारित किया गया है कि यदि धारक या एक पृष्ठांकक पूर्विक सभी पक्षकारों को सूचना भेजना चाहता है तो वह जितने भी पृष्ठांकक हैं उतने दिन का दावा नहीं कर सकता है, परन्तु वह उस समय के अन्दर सूचना भेजने के लिए आवद्ध होगा जितना कि उसे तुरन्त पूर्व के पृष्ठांकक के लिए मिलता।

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