केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि कोई व्यक्ति विवाह तय होने से पहले दूसरी महिला के साथ वैवाहिक प्रकृति के संबंध और उससे हुए बच्चे की बात अपनी होने वाली पत्नी से छिपाता है और इसके बाद शादी के आधार पर उसके साथ यौन संबंध बनाता है, तो प्रथम दृष्टया यह भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 69 के तहत 'छलपूर्ण साधनों' (Deceitful Means) के दायरे में आ सकता है।

जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने यह टिप्पणी एक आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए की। मामला SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत अग्रिम जमानत से जुड़ा था।

क्या है पूरा मामला?

आरोप है कि आरोपी, जो SC/ST समुदाय से संबंधित नहीं है, ने अपनी शादी एक SC/ST समुदाय की महिला से तय होने के समय यह महत्वपूर्ण तथ्य छिपाया कि उसका पहले से एक महिला के साथ लिव-इन संबंध जैसा रिश्ता था और उस संबंध से उसका तीन साल का बच्चा भी था।

आरोप के मुताबिक, आरोपी ने पीड़िता को वायनाड के एक होटल में ले जाकर इस आधार पर उसके साथ यौन संबंध बनाए कि दोनों की शादी तय हो चुकी है।

आरोपी के खिलाफ BNS की धारा 318(4) (धोखाधड़ी), धारा 3(5) (साझा मंशा), धारा 69 (छलपूर्ण साधनों के जरिए यौन संबंध) और SC/ST Act की धारा 3(2)(va) के तहत अपराध दर्ज हैं।

आरोपी की दलील क्या थी?

आरोपी की ओर से दलील दी गई कि BNS की धारा 318(4) के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं बनता, क्योंकि शिकायतकर्ता को किसी संपत्ति की डिलीवरी नहीं की गई।

यह भी कहा गया कि धारा 69 BNS लागू नहीं हो सकती, क्योंकि आरोपी ने शादी का वादा वापस नहीं लिया है और वह अब भी पीड़िता से शादी करने के लिए तैयार है।

आरोपी ने यह भी तर्क दिया कि केवल अपने पुराने संबंध और बच्चे के बारे में जानकारी छिपाना प्रथम दृष्टया अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए SC/ST Act की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत पर रोक लागू नहीं होनी चाहिए।

अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?

अभियोजन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि आरोपी ने वैवाहिक प्रकृति के पुराने संबंध और उससे हुए बच्चे की जानकारी छिपाई और इसी तथ्य को छिपाकर शादी के आधार पर पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाए।

अभियोजन के अनुसार, यह आचरण BNS की धारा 69 में बताए गए 'छलपूर्ण साधनों' के अंतर्गत आता है।

कोर्ट ने धारा 69 BNS पर क्या कहा?

हाईकोर्ट ने धारा 69 BNS की व्याख्या करते हुए कहा कि यह प्रावधान दो परिस्थितियों से संबंधित है।

पहली स्थिति में कोई व्यक्ति छलपूर्ण साधनों का इस्तेमाल करके महिला के साथ यौन संबंध बनाता है और वह कृत्य बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता।

दूसरी स्थिति में कोई व्यक्ति शादी करने का इरादा न रखते हुए शादी का वादा करता है और उस वादे के आधार पर महिला के साथ यौन संबंध बनाता है।

कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में आरोपी को शादी तय होने से पहले ही अपने पुराने संबंध और उससे हुए बच्चे की जानकारी थी। इसके बावजूद उसने यह महत्वपूर्ण तथ्य पीड़िता और उसके परिवार से छिपाया और शादी तय हुई।

इसके बाद शादी के आधार पर पीड़िता के साथ यौन संबंध बनाए गए।

कोर्ट ने कहा कि भले ही इस कृत्य को बलात्कार न माना जाए, लेकिन प्रथम दृष्टया यह धारा 69 BNS में बताए गए 'छलपूर्ण साधनों' वाली स्थिति में आ सकता है।

SC/ST Act की धारा 18 क्यों लागू हुई?

हाईकोर्ट ने पाया कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए BNS के अपराध SC/ST Act की अनुसूची में शामिल संबंधित अपराधों के अनुरूप हैं। इसलिए SC/ST Act की धारा 3(2)(va) भी प्रथम दृष्टया आकर्षित होती है।

कोर्ट ने माना कि इस स्तर पर आरोपी के खिलाफ लगाए गए अपराध प्रथम दृष्टया बनते हैं। ऐसे में SC/ST Act की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत पर रोक लागू होगी।

कोर्ट ने अग्रिम जमानत क्यों खारिज की?

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि मामले में हिरासत में लेकर पूछताछ (custodial interrogation) जरूरी है।

अदालत के अनुसार, आरोपी को अग्रिम जमानत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।

इस आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज कर दी और Special Court के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अग्रिम जमानत देने से इनकार किया गया था।

कोर्ट की टिप्पणी का महत्व

इस फैसले में हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि मामला केवल पुराने संबंध को छिपाने का नहीं है। अदालत ने विशेष रूप से पहले से मौजूद वैवाहिक प्रकृति के संबंध और बच्चे के बारे में महत्वपूर्ण तथ्य छिपाने तथा उसके बाद शादी के आधार पर यौन संबंध बनाने को धारा 69 BNS के संदर्भ में देखा।

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