केरल हाईकोर्ट ने कहा कि Protection of Women from Domestic Violence Act, 2005 (PWDV Act) के तहत किसी व्यक्ति के खिलाफ कार्यवाही के लिए उसके और पीड़िता के बीच घरेलू संबंध (Domestic Relationship) का होना जरूरी है।

जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने यह टिप्पणी PWDV Act की कार्यवाही रद्द करने की मांग वाली याचिका पर की। कोर्ट ने पति के भाई और बहन (देवर-ननद) के खिलाफ लंबित कार्यवाही रद्द कर दी।

याचिकाकर्ताओं ने कहा था कि वे महिला के साथ कभी साझा घर में नहीं रहे और उनके खिलाफ केवल सामान्य एवं अस्पष्ट आरोप लगाए गए हैं।

कोर्ट ने PWDV Act की धारा 2(f) का उल्लेख करते हुए कहा कि घरेलू संबंध के लिए यह स्थापित होना चाहिए कि पक्षकार किसी समय साझा घर में साथ रहे हों।

“किसी व्यक्ति को 'घरेलू संबंध' के दायरे में लाने के लिए यह स्थापित होना चाहिए कि पक्षकार एक साझा घर में रहते हैं या किसी समय वहां साथ रह चुके हैं।”

कोर्ट ने कहा कि PWDV Act की अर्जी में सिविल मुकदमे जैसी तकनीकी pleading जरूरी नहीं है, लेकिन घरेलू संबंध के अस्तित्व का कुछ तथ्यात्मक आधार होना चाहिए।

अदालत ने पाया कि मौजूदा मामले में आवेदन में ऐसा कोई उल्लेख नहीं था कि देवर और ननद कभी महिला के साथ साझा घर में रहे थे।

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ सामान्य आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति को PWDV Act के तहत प्रतिवादी नहीं बनाया जा सकता।

इस आधार पर हाईकोर्ट ने दोनों के खिलाफ लंबित कार्यवाही को कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए रद्द कर दिया।

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