BREAKING| CMRL-Exalogic मामले में केरल के पूर्व सीएम पिनाराई विजयन और उनकी बेटी के खिलाफ FIR का आदेश
केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार (9 अक्टूबर) को CMRL-Exalogic पे-ऑफ मामले में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन, उनकी बेटी वीणा और दामाद मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत अपराधों को शामिल करते हुए FIR दर्ज करने का निर्देश दिया। [2026 LiveLaw (Ker) 567]
जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने आज KM शाहजहाँ द्वारा दायर रिट याचिका पर खुली अदालत में फैसला सुनाया:
"रिट याचिका मंजूर। FIR दर्ज करने का निर्देश।"
पिछले सप्ताह, कोर्ट ने एडवोकेट जनरल के. जाजू बाबू, याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट वी. सेतुनाथ और ED की ओर से पेश जयशंकर वी. नायर की विस्तृत दलीलें सुनी थीं। इसके बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कोर्ट ने कहा कि विचार करने के लिए कानूनी सवाल यह था कि क्या राज्य पुलिस बिना प्रारंभिक जांच के FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है, जब ED द्वारा PMLA [मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम] की धारा 66(2) के तहत जानकारी दी गई हो।
ED और याचिकाकर्ता दोनों ने तर्क दिया कि इस मामले के तथ्यों में प्रारंभिक जांच की कोई गुंजाइश नहीं थी और राज्य पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करनी चाहिए। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि इस मामले में विजिलेंस विभाग के किसी सदस्य के बिना एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और कैबिनेट के फैसले के बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने तर्क दिया कि सरकारी आदेश के अनुसार यही कानून है।
ED के वकील ने यह भी कहा कि जांच के दौरान अपराध किए जाने के बारे में राज्य पुलिस प्रमुख के साथ जानकारी साझा की गई। उन्होंने कहा कि ED को कुछ ऐसे लेनदेन के बारे में जानकारी मिली जिनकी जांच राज्य पुलिस या विजिलेंस (जैसा भी मामला हो) द्वारा की जानी चाहिए, क्योंकि ये प्रेडिकेट अपराध (मूल अपराध) थे।
AG ने तर्क दिया कि यदि जांच एजेंसी को लगता है कि कुछ सत्यापन की आवश्यकता है तो प्रारंभिक जांच वांछनीय है। उन्होंने यह भी बताया कि ED पुलिस की तरह जांच करने वाली एजेंसी नहीं है, बल्कि सिर्फ़ जानकारी इकट्ठा करने वाली एजेंसी है। AG ने यह भी तर्क दिया कि मौजूदा याचिका समय से पहले दायर की गई है और यह सुनवाई के लायक नहीं है।
Case Title : Adv. K.M. Shajahan v. State of Kerala and Ors.