केरल हाईकोर्ट ने सोमवार (26 अक्टूबर) को CMRL-Exalogic कथित पे-ऑफ मामले में पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी. और दामाद एवं पूर्व मंत्री मोहम्मद रियास के खिलाफ दर्ज FIR पर रोक लगा दी। जस्टिस के. नटराजन और जस्टिस जॉनसन जॉन की डिवीजन बेंच ने आगे की विजिलेंस जांच और FIR दर्ज करने का निर्देश देने वाले सिंगल बेंच के फैसले पर भी रोक लगाई। मामले में अंतिम सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

अपीलकर्ताओं की दलीलें

अपीलकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने दलील दी कि याचिकाकर्ता के.एम. शाहजहां ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 175 के तहत उपलब्ध प्रक्रिया अपनाए बिना सीधे हाईकोर्ट का रुख किया। उन्होंने कहा कि सिंगल बेंच ने प्रभावित पक्षों को सुने बिना उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया और जांच अधिकारी की भूमिका में प्रवेश किया।

अपीलकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि उपलब्ध सामग्री से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। केवल वीणा की कंपनी से जुड़े लेनदेन के आधार पर उनके पिता पिनराई विजयन और पति मोहम्मद रियास को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि कथित भुगतान का लाभार्थी कौन था।

सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि सिंगल बेंच के फैसले में कानूनी त्रुटियां थीं। अपीलकर्ताओं ने यह भी दलील दी कि कंपनी अधिनियम की धारा 212 के तहत SFIO की जांच के चलते अन्य एजेंसियों की जांच के अधिकार पर सवाल उठता है।

राज्य और ED का पक्ष

राज्य की ओर से एडवोकेट जनरल के. जाजू बाबू ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय से मिली जानकारी के आधार पर सरकार ने पहले प्रारंभिक जांच के लिए SIT गठित की थी। सिंगल बेंच के आदेश के बाद राज्य ने उसका सम्मान करते हुए विजिलेंस FIR दर्ज की।

वहीं, ED की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल पी. श्रीकुमार ने दलील दी कि संज्ञेय अपराध का खुलासा करने वाली जानकारी मिलने पर FIR दर्ज करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि कंपनी अधिनियम की धारा 212 का प्रावधान PMLA के मामलों पर लागू नहीं होता।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि राज्य के पुलिस प्रमुख को जानकारी देने के बाद मजिस्ट्रेट के पास जाने का कोई वैकल्पिक उपाय उपलब्ध नहीं था।

क्या है मामला?

यह मामला CMRL और वीणा टी. की कंपनी Exalogic Solutions के बीच कथित वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। ED से मिली जानकारी के आधार पर राज्य सरकार ने प्रारंभिक जांच के लिए SIT गठित की थी।

सिंगल बेंच ने प्रारंभिक जांच के फैसले को अवैध मानते हुए विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) को पिनराई विजयन, वीणा और मोहम्मद रियास के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत FIR दर्ज करने का निर्देश दिया था। साथ ही, SIT गठन का आदेश रद्द कर दिया था।

तीनों ने डिवीजन बेंच में अपील की अनुमति नहीं मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। 21 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अपील दाखिल करने की अनुमति दी और जांच पर 10 दिनों के लिए रोक लगाई थी।

अब केरल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने FIR, आगे की विजिलेंस जांच और सिंगल बेंच के आदेश पर रोक लगा दी है। मामले की अंतिम सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।

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