हाईकोर्ट ने मोहनलाल की फिल्म 'एम्पुराण' की स्क्रीनिंग पर रोक लगाने से इनकार किया, BJP नेता की याचिका को प्रचार हित कहकर खारिज किया

केरल हाईकोर्ट ने मंगलवार (01 अप्रैल) को मोहनलाल अभिनीत बड़े बजट की फिल्म एम्पुराण की स्क्रीनिंग पर रोक लगाने से इनकार किया, जो 27 मार्च को सिनेमाघरों में आई थी।
यह फिल्म तब विवाद का केंद्र बन गई, जब कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने 2002 के गुजरात दंगों के चित्रण पर आपत्ति जताई। BJP नेता वीवी विजेश ने सांप्रदायिक हिंसा की आशंका जताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने से इनकार करते हुए जस्टिस सीएस डायस ने भाजपा नेता की ईमानदारी पर संदेह जताते हुए इसे 'प्रचार हित याचिका' बताया।
जज ने मौखिक रूप से टिप्पणी की,
"क्या इसे सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाणित नहीं किया गया। फिल्म की रिलीज से पहले कानून के अनुसार इसे सेंसर बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया जाना चाहिए। यह सामने आ चुका है। इसके बाद क्या आपत्ति उठाई जा रही है। आप अनावश्यक रूप से ऐसी चीजों को प्रचारित कर रहे हैं। सभी प्रचार-उन्मुख मुकदमेबाजी मुझे आपकी ईमानदारी पर संदेह है।”
न्यायालय ने BJP नेता से यह भी पूछा कि क्या वह फिल्म द्वारा भड़काई गई किसी भी हिंसक घटना का उल्लेख कर सकते हैं जो लगभग एक सप्ताह से सिनेमाघरों में है।
इस मोड़ पर सरकारी वकील ने अदालत को सूचित किया कि आज तक ऐसा कोई मामला दर्ज नहीं किया गया, जो यह संकेत दे कि फिल्म ने किसी समस्या को जन्म दिया है।
सरकारी वकील ने सेबिन थॉमस बनाम भारत संघ और विभिन्न अन्य निर्णयों का हवाला देते हुए दलील दी कि एक बार वैधानिक अधिकारियों द्वारा प्रमाण पत्र जारी किए जाने के बाद यह अनुमान लगाया जाता है कि फिल्म प्रमाणन के लिए उपयुक्त है।
उप सॉलिसिटर जनरल ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से नोटिस लिया सरकारी वकील ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से नोटिस लिया और सरकारी वकील ने पुलिस महानिदेशक की ओर से नोटिस लिया। न्यायालय ने अन्य पक्षों को नोटिस भेजने से छूट दी।
मामला अब गर्मी की छुट्टियों के बाद पोस्ट किया गया।
केस टाइटल: वी. वी. विजेश बनाम सचिव और अन्य