झारखंड हाईकोर्ट ने अडानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार की
झारखंड हाईकोर्ट ने 15 अप्रैल 2026 के आदेश में गोड्डा जिले में अडानी थर्मल पावर प्रोजेक्ट के लिए 1,363 एकड़ से अधिक कृषि भूमि के अधिग्रहण को चुनौती देने वाली रिट याचिका को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई करने का निर्देश दिया।
इस मामले की सुनवाई जस्टिस आनंद सेन की एकल पीठ ने की।
याचिका में भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी गई है, जो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम, 2013 के तहत की गई थी। इसमें अधिनियम की धारा 4, 5, 11 और 19 के तहत जारी अधिसूचनाओं के साथ-साथ दिसंबर 2016 की सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (SIA) रिपोर्ट और 7 अप्रैल 2017 की एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) रिपोर्ट को भी चुनौती दी गई है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अधिग्रहण प्रक्रिया कानून के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना की गई, इसलिए यह शुरू से ही अवैध (void ab initio) है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासन ने “प्रभावित व्यक्तियों” की श्रेणी को केवल भूमिधारकों तक सीमित कर दिया, जबकि लगभग 4,000 अन्य लोग—जैसे कृषि मजदूर, बटाईदार, मछुआरे, कारीगर और किरायेदार—भी इस परियोजना से प्रभावित होंगे।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि यह थर्मल पावर प्रोजेक्ट अधिनियम की धारा 2(1) के तहत “लोक उद्देश्य” (public purpose) की परिभाषा में नहीं आता, क्योंकि यह एक निजी कंपनी अडानी पावर लिमिटेड के लिए स्थापित किया जा रहा है और इससे उत्पन्न बिजली बांग्लादेश को निर्यात की जाएगी।
इसके अलावा, याचिकाकर्ताओं ने कहा कि अधिनियम की धारा 2(2)(b)(i) के तहत आवश्यक भूमि मालिकों की पूर्व सहमति भी विधि के अनुसार प्राप्त नहीं की गई। लगभग 400 भूमिधारकों ने अपनी असहमति (Form V) में दर्ज कराई थी। साथ ही, सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट प्रक्रिया को भी कानून के अनुरूप न होने का आरोप लगाया गया है।
हाईकोर्ट ने इन सभी मुद्दों पर विचार करते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया है और मामले की सुनवाई जारी रखने का निर्देश दिया है।