पूर्ण बरी होने या निलंबन पूरी तरह अनुचित पाए जाने पर ही मिलेगा निलंबन अवधि का पूरा वेतन: झारखंड हाईकोर्ट

Update: 2026-04-30 07:37 GMT

झारखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी निलंबित कर्मचारी को बिना पूर्ण दोषमुक्ति के सेवा में बहाल किया जाता है अथवा निलंबन को पूरी तरह अनुचित नहीं ठहराया जाता तो वह निलंबन अवधि के लिए पूर्ण वेतन और निर्वाह भत्ता के अंतर की मांग नहीं कर सकता। ऐसे मामलों में कर्मचारी को केवल उतना ही वेतन और भत्ता मिलेगा, जितना सक्षम प्राधिकारी उचित समझे।

जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने यह निर्णय देते हुए कर्मचारी की अपील खारिज की और एकलपीठ का आदेश बरकरार रखा।

मामले के अनुसार कर्मचारी दामोदर घाटी निगम में सहायक ऑपरेटर (विद्युत) के पद पर कार्यरत था। वैवाहिक विवाद के चलते उसके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद वर्ष 2002 में उसे निलंबित किया गया। विभागीय जांच में उस पर विवाह की जानकारी निगम को न देने, दहेज मांगने, पत्नी को छोड़ने तथा बिना अनुमति मुख्यालय छोड़ने जैसे आरोप लगाए गए।

जांच के बाद दो आरोप सिद्ध पाए गए जिसके आधार पर विभागीय प्राधिकारी ने एक वर्ष के लिए एक वेतनवृद्धि रोकने की लघु सजा दी। कर्मचारी की अपील भी खारिज की गई।

कर्मचारी 25 अक्तूबर 2002 से 1 मई 2007 तक निलंबित रहा और इस दौरान उसे निर्वाह भत्ता दिया गया। बाद में आपराधिक मामला समझौते से समाप्त हो गया, जिसके पश्चात विभाग ने निलंबन अवधि को 'नॉन-ड्यूटी' घोषित किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि दामोदर घाटी निगम सेवा विनियम, 1957 के विनियम 100 के अनुसार निलंबन अवधि का पूरा वेतन तभी दिया जा सकता है जब सक्षम प्राधिकारी यह दर्ज करे कि कर्मचारी पूरी तरह दोषमुक्त है या निलंबन पूर्णतः अनुचित था।

अदालत ने पाया कि कर्मचारी विभागीय आरोपों से पूर्णतः दोषमुक्त नहीं हुआ था बल्कि कुछ आरोप सिद्ध होने पर उसे दंडित भी किया गया। साथ ही सक्षम प्राधिकारी ने निलंबन को कभी पूर्णतः अनुचित नहीं माना।

खंडपीठ ने कहा,

“जब कर्मचारी न तो पूर्ण रूप से दोषमुक्त हुआ हो और न ही निलंबन को पूरी तरह अनुचित ठहराया गया हो, तब वह निलंबन अवधि के लिए पूर्ण वेतन का दावा नहीं कर सकता।”

अदालत ने यह भी माना कि कर्मचारी के अपने आचरण के कारण निलंबन की स्थिति उत्पन्न हुई, जिससे नियोक्ता उसकी सेवाओं का उपयोग नहीं कर सका। इसलिए निलंबन अवधि को नॉन-ड्यूटी मानना उचित था।

इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट ने कर्मचारी की अपील खारिज की।

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