पंचायत सचिव को 'तुम-ताम' या 'मेरे-तेरे' कहकर बुलाना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: झारखंड हाईकोर्ट ने BDO के खिलाफ FIR रद्द की

Update: 2026-07-06 14:05 GMT

झारखंड हाईकोर्ट ने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर (BDO) के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही रद्द की। उन पर एक पंचायत सचिव को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि मृतक को सिर्फ़ "तुम-ताम" या "मेरे-तेरे" कहकर बुलाना आत्महत्या के लिए उकसाने जैसा नहीं है। कोर्ट ने माना कि अगर FIR में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सच भी मान लिया जाए तो भी वे भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध की शर्तों को पूरा नहीं करते हैं।

जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की सिंगल जज बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें FIR और डुमरी पुलिस स्टेशन केस नंबर 70/2025 (भारतीय न्याय संहिता की धारा 108, 61, 316, 351 और 352 के तहत दर्ज) से जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की मांग की गई। याचिकाकर्ता उस समय डुमरी में ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर के पद पर तैनात थीं। उन पर आरोप था कि उन्होंने मृतक पंचायत सचिव सुखलाल महतो के साथ "तुम-ताम" और "मेरे-तेरे" कहकर बुरा बर्ताव किया था।

हाईकोर्ट के सामने याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि अगर FIR के आरोपों को सच भी मान लिया जाए तो भी कोई अपराध नहीं बनता। आगे यह भी तर्क दिया गया कि कोई ऐसी आम बात जिससे परेशानी हो सकती है, वह अपने आप में BNS की धारा 108 (जो भारतीय दंड संहिता की धारा 306 के बराबर है) के तहत उकसावा नहीं मानी जाएगी। याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का भी हवाला दिया और कहा कि उकसाने के कथित काम और आत्महत्या के बीच सीधा संबंध होना चाहिए।

कानूनी स्थिति की जांच करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि BNS की धारा 108 के तहत "उकसाने" (Instigation) के लिए ज़रूरी है कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे को कोई काम करने के लिए प्रेरित करे, आग्रह करे, उकसाए या बढ़ावा दे। 'चित्रेश कुमार चोपड़ा बनाम राज्य' और 'रमेश कुमार बनाम छत्तीसगढ़ राज्य' मामलों में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि उकसावे से नतीजे का संकेत मिलना चाहिए और व्यवहार का ऐसा लगातार क्रम होना चाहिए, जिससे मरने वाले के पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प न बचे।

इन सिद्धांतों को लागू करते हुए कोर्ट ने पाया कि याचिकाकर्ता पर एकमात्र आरोप यह था कि उसने मृतक को "तुम-ताम" और "मेरे-तेरे" जैसे शब्दों से संबोधित किया। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि जांच के दौरान गवाहों के बयानों से यह आरोप भी झूठा पाया गया, जैसा कि राज्य के जवाबी हलफनामे के पैराग्राफ 14 में बताया गया। कोर्ट ने माना कि अगर आरोप को सच भी मान लिया जाए तो भी केवल ऐसे शब्दों का इस्तेमाल आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने कहा:

"ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर द्वारा पंचायत सचिव के लिए 'तुम-ताम' और 'तेरे-मेरे' शब्दों का इस्तेमाल करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं कहा जा सकता।"

यह मानते हुए कि FIR में लगाए गए आरोपों में से कोई भी अपराध नहीं बनता, भले ही अभियोजन पक्ष के पूरे मामले को सच मान लिया जाए, हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

इसके अनुसार, कोर्ट ने याचिकाकर्ता के खिलाफ FIR और पूरी आपराधिक कार्यवाही रद्द की।

Case Title: Anvesha Ona v. State of Jharkhand.

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