10 साल की बच्ची का हाथ पकड़कर शादी का प्रस्ताव देना मात्र से धारा 354 लागू नहीं होगी, गलत मंशा साबित होना जरूरी: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति 10 वर्षीय बच्ची का हाथ पकड़कर उससे शादी का प्रस्ताव देता है, लेकिन उसके पीछे कोई यौन या अशोभनीय मंशा साबित नहीं होती, तो मात्र इस आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 (महिला की लज्जा भंग करना) का अपराध नहीं बनता।
जस्टिस राजेश कुमार की सिंगल बेंच ने आपराधिक अपील स्वीकार करते हुए धारा 354 के तहत दोषी ठहराए गए आरोपी को बरी किया। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के अपने बयान से ही इस अपराध के आवश्यक तत्व साबित नहीं होते।
यह अपील सरायकेला-खरसावां के विशेष अदालत (POCSO) द्वारा 22 अगस्त 2023 को सुनाए गए दोषसिद्धि के फैसले और 28 अगस्त 2023 को दिए गए सजा के आदेश के खिलाफ दायर की गई। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को धारा 354 के तहत दोषी ठहराते हुए एक वर्ष के कठोर कारावास और एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।
पूरा मामला
अभियोजन के अनुसार 21 जून 2017 को 10 वर्षीय बच्ची स्कूल से घर लौट रही थी। आरोप था कि रास्ते में आरोपी ने उसका हाथ पकड़ लिया और उससे शादी करने की बात कहते हुए उसे अपने साथ ले जाने का प्रयास किया। बच्ची के शोर मचाने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और उसे छुड़ा लिया।
जांच के बाद पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 और POCSO Act की धारा 8 के तहत आरोपपत्र दाखिल किया।
हाईकोर्ट ने पीड़िता के बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि उसने केवल इतना कहा था कि आरोपी ने उससे शादी का प्रस्ताव रखा और इस दौरान कुछ मिनटों के लिए उसका हाथ पकड़ा था। उसके बयान में कहीं भी यह नहीं था कि आरोपी की कोई यौन या अशोभनीय मंशा थी।
कोर्ट ने कहा,
"पीड़िता के बयान से यह स्पष्ट है कि युवक ने केवल शादी का प्रस्ताव रखा था और उसके पीछे कोई गलत मंशा नहीं थी। ऐसे में IPC की धारा 354 के आवश्यक तत्व इस मामले में लागू नहीं होते।"
अदालत ने माना कि अभियोजन धारा 354 के अपराध के आवश्यक तत्व सिद्ध करने में विफल रहा। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा का आदेश रद्द करते हुए आरोपी को बरी किया।