अनुकंपा आधार पर उच्च पद की नियुक्ति अधिकार नहीं, सरकार का विवेकाधीन अधिकार : जम्मू-कश्मीर-लद्दाख हाइकोर्ट
जम्मू-कश्मीर-लद्दाख हाइकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि अनुकंपा आधार पर उच्च पद पर नियुक्ति किसी व्यक्ति का अधिकार नहीं होती बल्कि यह पूरी तरह सरकार का विवेकाधीन अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में नियुक्ति केवल नियमों के अनुसार ही दी जा सकती है और इसे अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता।
जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की खंडपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन की अपील स्वीकार की और एकल पीठ का आदेश रद्द किया, जिसमें याचिकाकर्ता को पहले की तारीख से स्टोरकीपर पद पर नियुक्त मानने का निर्देश दिया गया।
पूरा मामला
यह मामला अनंतनाग के उपायुक्त द्वारा मृत कर्मचारी के आश्रित को अनुकंपा आधार पर स्टोरकीपर पद पर नियुक्त करने से जुड़ा है। यह नियुक्ति जम्मू-कश्मीर अनुकंपा नियुक्ति नियम 1994 (एसआरओ-43) के तहत की गई।
हालांकि, बाद में उसे उस पद पर ज्वाइन करने की अनुमति नहीं दी गई, क्योंकि भर्ती नियमों के अनुसार स्टोरकीपर पद पदोन्नति वाला पद था। इसके बजाय उसे चतुर्थ श्रेणी के पद पर नियुक्त होकर काम करने दिया गया।
इस निर्णय से असंतुष्ट होकर संबंधित व्यक्ति ने हाइकोर्ट का रुख किया। बाद में सरकार ने भी उसके उच्च पद पर नियुक्ति के दावे को खारिज कर दिया और उसकी नियुक्ति को चतुर्थ श्रेणी पद पर ही मान्य माना।
एकल पीठ ने याचिका पर आंशिक राहत देते हुए निर्देश दिया कि उसे एक निश्चित तारीख से स्टोरकीपर माना जाए। हालांकि आर्थिक लाभ नहीं दिए जाएंगे। इसी आदेश के खिलाफ प्रशासन ने अपील दायर की थी।
हाइकोर्ट की टिप्पणी
खंडपीठ ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति सामान्य भर्ती प्रक्रिया से एक अपवाद है और इसका उद्देश्य केवल मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देना है, न कि परिवार को किसी विशेष पद या दर्जे का अधिकार देना।
अदालत ने कहा,
“नियम 3(2) के तहत सरकार को विवेकाधीन शक्ति दी गई कि वह मृत कर्मचारी के परिवार के सदस्य को गैर-राजपत्रित सेवा के किसी उच्च पद पर नियुक्त कर सकती है यदि वह संबंधित नियमों के अनुसार योग्य और पात्र हो। यह शक्ति पूरी तरह विवेकाधीन है, इसलिए उच्च पद पर नियुक्ति को अधिकार के रूप में नहीं मांगा जा सकता।”
खंडपीठ ने यह भी कहा कि एसआरओ-43 के तहत सामान्य नियम यही है कि अनुकंपा नियुक्ति निम्नतम गैर-राजपत्रित या चतुर्थ श्रेणी पद पर ही दी जाती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति अनुकंपा आधार पर किसी पद पर नियुक्ति स्वीकार कर लेता है तो बाद में उसी आधार पर किसी अन्य समान या उच्च पद की मांग नहीं कर सकता।
इस संबंध में अदालत ने कहा,
“एक बार जब कोई व्यक्ति अनुकंपा आधार पर नियुक्ति स्वीकार कर लेता है तो वह बाद में किसी अन्य समान या उच्च पद की नियुक्ति की मांग करने से वंचित हो जाता है।”
खंडपीठ ने यह भी कहा कि यदि किसी अन्य व्यक्ति को नियमों के विपरीत लाभ दिया गया हो तो उससे कोई वैध अधिकार पैदा नहीं होता। अदालत ने कहा कि किसी एक अवैध आदेश के आधार पर प्रशासन को बार-बार वही गलती दोहराने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
हाइकोर्ट ने पाया कि स्टोरकीपर पद भर्ती नियमों के अनुसार पदोन्नति वाला पद है। इसके लिए आवश्यक योग्यता तथा वरिष्ठता की शर्तें लागू होती हैं। इसलिए संबंधित व्यक्ति केवल बाद में अनुभव प्राप्त करने के आधार पर उस पद का दावा नहीं कर सकता।
इन तथ्यों को देखते हुए खंडपीठ ने प्रशासन की अपील स्वीकार करते हुए एकल पीठ का आदेश रद्द किया।