जम्मू-कश्मीर डेवलपमेंट एक्ट और पंचायती राज एक्ट में बिल्डिंग रेगुलेशन को लेकर कोई टकराव नहीं: हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया कि जम्मू-कश्मीर डेवलपमेंट एक्ट, 1970 और जम्मू-कश्मीर पंचायती राज एक्ट, 1989, के बीच बिल्डिंग बनाने की परमिशन और उनके उल्लंघन के मामले में कोई टकराव नहीं है।
कोर्ट ने फैसला दिया कि अगर कोई इलाका किसी ऐसे 'नोटिफाइड एरिया' का हिस्सा है, जिसके लिए जम्मू-कश्मीर लेक्स कंज़र्वेशन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (LCMA) बनाई गई तो सिर्फ़ LCMA के पास ही बिल्डिंग बनाने की परमिशन देने और यह पक्का करने का अधिकार क्षेत्र है कि ऐसी परमिशन के बिना या उसके उल्लंघन में कोई कंस्ट्रक्शन न हो।
कोर्ट हरवान ब्लॉक के रहने वालों की तरफ़ से दायर एक 'लेटर्स पेटेंट अपील' पर सुनवाई कर रहा था। इस अपील में सिंगल जज के उस आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें उनकी रिट याचिका खारिज की गई। इस याचिका में यह घोषणा करने की मांग की गई कि LCMA के पास उनके गांवों पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।
जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीज़न बेंच ने अपील खारिज करते हुए यह टिप्पणी की,
“हमें 1970 के डेवलपमेंट एक्ट और 1989 के पंचायती राज एक्ट के बीच, जहां तक बिल्डिंग बनाने की परमिशन और उनके उल्लंघन का सवाल है, कोई टकराव नज़र नहीं आता। अगर हरवान का इलाका किसी ऐसे 'नोटिफाइड एरिया' का हिस्सा है, जिसके लिए LCMA बनाई गई तो सिर्फ़ LCMA और 'कंट्रोल ऑफ़ बिल्डिंग अथॉरिटी' के पास ही बिल्डिंग बनाने की परमिशन देने का अधिकार क्षेत्र होगा।”
Cause Title: Inhabitants of Block Harwan v. Union Territory of J&K & Ors.