सिर्फ़ शादी वाला घर बेचना IPC की धारा 498A के तहत दहेज उत्पीड़न नहीं माना जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-05-15 13:48 GMT

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि सिर्फ़ शादी वाला घर बेचना अपने आपमें भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498-A के तहत दहेज उत्पीड़न का काम नहीं माना जा सकता।

जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा:

"स्टेटस रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि शिकायतकर्ता का दिल्ली में स्थित शादी वाला घर याचिकाकर्ताओं ने बेच दिया था, लेकिन ऐसा कोई भी काम, अगर हुआ भी है, तो उसे दहेज मांगने का काम नहीं माना जा सकता।"

मामले की पृष्ठभूमि

शिकायतकर्ता अंजलि राणा ने आरोप लगाया कि उनकी शादी याचिकाकर्ता राहुल डधवाल के साथ 11 अक्टूबर, 2021 को गाजियाबाद में हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार हुई थी। उन्होंने बताया कि 27 फरवरी, 2022 को उनके पति और ससुराल वालों ने उन्हें हिमाचल प्रदेश में उनके मायके छोड़ दिया और उन्हें भरोसा दिलाया कि बाद में उन्हें वापस उनके ससुराल ले जाया जाएगा।

शिकायत के अनुसार, पति के परिवार से बाद में किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं किया। जब 4 अप्रैल, 2022 को वह और उनके पिता दिल्ली में उनके ससुराल गए तो कथित तौर पर घर बंद मिला, और बाद में उन्हें पता चला कि परिवार कहीं और शिफ़्ट हो गया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि उनका सामान अभी भी उनके ससुराल वालों के कब्ज़े में है। इन आरोपों के आधार पर पुलिस स्टेशन बैजनाथ में IPC की धारा 498-A, 406 और 34 के तहत एक FIR दर्ज की गई।

हाईकोर्ट ने पाया कि दोनों पक्षों ने फ़ैमिली कोर्ट के सामने साफ़ तौर पर कहा था कि उन्होंने अपने विवादों को आपसी सहमति से सुलझा लिया और अब उनके बीच कुछ भी देना या लेना बाकी नहीं है। शिकायतकर्ता ने विशेष रूप से कहा था कि तलाक़ के फ़ैसले के बाद किसी भी पक्ष का दूसरे पक्ष पर कोई और दावा नहीं रहेगा।

इसके अलावा, शिकायतकर्ता के इस तर्क पर विचार करते हुए कि कुछ सोने के गहने और सामान वापस नहीं किए गए, कोर्ट ने पाया कि गहने वापस करने के कथित समझौते के समर्थन में कोई लिखित समझौता या दस्तावेज़ कोर्ट के सामने पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी दर्ज किया कि याचिकाकर्ताओं ने गहनों के बदले ₹1 लाख देने की पेशकश की थी। हालांकि शिकायतकर्ता ने इस पेशकश को स्वीकार नहीं किया।

इस प्रकार, अदालत ने यह निष्कर्ष निकाला कि शिकायतकर्ता द्वारा दहेज की मांग या संपत्ति के लिए ज़बरदस्ती का कोई आरोप नहीं लगाया गया। अदालत के अनुसार, शिकायतकर्ता की मुख्य शिकायत यह थी कि उसे उसके मायके में छोड़ दिया गया। बाद में उसने पाया कि उसका ससुराल बंद था। ऐसे आरोप भले ही उन्हें ज्यों का त्यों मान लिया जाए, IPC की धारा 498-A के तत्वों को पूरा नहीं करते थे।

Case Name: Rahul Dadhwal & others V/s State of H.P. & Others

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