केवल प्रोत्साहन राशि लेने पर आशा कार्यकर्ताओं को पंचायत चुनाव से अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-05-09 08:40 GMT

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की उस स्पष्टीकरण अधिसूचना पर रोक लगाई, जिसमें आशा कार्यकर्ताओं को अंशकालिक कर्मचारी मानते हुए पंचायत पदों के लिए अयोग्य ठहराया गया।

जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रंजन शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ताओं के पक्ष में मामला बनता है और उन्हें अंतरिम राहत दिए जाने का आधार मौजूद है।

मामला 2 मई 2026 को जारी राज्य सरकार की एक स्पष्टीकरण अधिसूचना से जुड़ा है। इसमें कहा गया कि आशा कार्यकर्ता निश्चित मासिक मानदेय और कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि पर अंशकालिक रूप से कार्य करती हैं। इसी आधार पर उन्हें हिमाचल प्रदेश पंचायती राज अधिनियम, 1994 की धारा 122(1)(ग) के तहत पंचायत पदाधिकारियों के चुनाव लड़ने से अयोग्य माना गया।

याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में दलील दी कि यह स्पष्टीकरण भारत सरकार की आशा कार्यकर्ताओं संबंधी मूल नीति और दिशा-निर्देशों के विपरीत है।

उन्होंने अदालत को बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को जारी नियुक्ति ज्ञापन में स्पष्ट कहा गया कि उन्हें सरकार की ओर से कोई वेतन या मानदेय नहीं दिया जाएगा, बल्कि केवल कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी कहा कि आशा कार्यकर्ता स्वैच्छिक सामाजिक कार्यकर्ता होती हैं और उनका काम इस तरह तय किया जाता है कि उनकी सामान्य आजीविका प्रभावित न हो।

अदालत के समक्ष यह भी रखा गया कि पंचायती राज विभाग पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि आशा कार्यकर्ता स्वैच्छिक आधार पर कार्य करती हैं। वे न तो नियमित सरकारी कर्मचारी हैं, न संविदा कर्मचारी और न ही अंशकालिक कर्मचारी।

इन्हीं दलीलों को देखते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की स्पष्टीकरण अधिसूचना के अमल पर फिलहाल रोक लगाई।

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