राज्य सड़क मरम्मत कार्य के लिए अपनी जवाबदेही से बच नहीं सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दुर्घटना में मारे गए युवक के लिए मुआवज़ा सही ठहराया
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 25 साल के युवक की माँ को दिए गए मुआवज़े को सही ठहराया। इस युवक की मौत नेशनल हाईवे-20 पर असुरक्षित सड़क मरम्मत कार्य के कारण हुई मोटरसाइकिल दुर्घटना में हुई थी। कोर्ट ने राज्य के अधिकारियों और ठेकेदार को लापरवाही का दोषी ठहराया, क्योंकि उन्होंने घटनास्थल पर चेतावनी वाले साइनबोर्ड और सुरक्षा के पर्याप्त उपाय नहीं किए।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि अधिकारियों का यह फ़र्ज़ था कि वे सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से को ठीक से बैरिकेड करें, वहां रोशनी का इंतज़ाम करें और सड़क इस्तेमाल करने वालों को चल रहे मरम्मत कार्य के बारे में सावधान करें।
कोर्ट ने आगे यह भी कहा कि राज्य के अधिकारी 'मेज़रमेंट बुक' (माप-जोख की किताब) पेश करने में नाकाम रहे। इस किताब में खर्च का ब्योरा और सुरक्षा इंतज़ामों (जैसे साइनबोर्ड और गाइड स्टोन) से जुड़ी जानकारी दर्ज होती है। कोर्ट ने उन तस्वीरों पर भी भरोसा किया, जिनमें सड़क के बीचों-बीच पत्थर रखे हुए दिख रहे थे, जिन पर न तो सफ़ेदी की गई और न ही कोई चेतावनी देने वाला उचित उपाय किया गया।
जस्टिस सुशील कुकरेजा ने टिप्पणी की:
"चूंकि यह प्रतिवादियों (अधिकारियों और ठेकेदार) का फ़र्ज़ था कि वे साइनबोर्ड लगाएं और सड़क की खराब हालत के बारे में सड़क इस्तेमाल करने वालों को सावधान करने के लिए सुरक्षा के उपाय करें, इसलिए ट्रायल कोर्ट ने यह फ़ैसला बिल्कुल सही दिया कि वादी (मुकदमा दायर करने वाले) का बेटा प्रतिवादियों की लापरवाही के कारण हुई दुर्घटना में मारा गया। साथ ही अदालत ने वादी को 3,33,000 रुपये का मुआवज़ा पाने का हकदार भी माना है।"
कोर्ट ने आगे कहा:
"यह बात मानी हुई है कि यह सड़क PWD (लोक निर्माण विभाग) की है और उसी के द्वारा इसका रखरखाव किया जाता था। इसलिए यह उनकी ही मुख्य ज़िम्मेदारी थी कि वे यह सुनिश्चित करें कि सड़क को ठीक से बैरिकेड किया जाए, उस इलाके में रोशनी का इंतज़ाम हो, और सड़क की खराब हालत के बारे में चेतावनी वाले साइनबोर्ड लगाए जाएं।"
Case Name: The District Collector, Mandi V/s Ved Vatti another