दो लोगों को कुचलने के बाद जरूरत का बचाव नहीं ले सकता बस चालक: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

Update: 2026-05-09 06:23 GMT

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 81 के तहत जरूरत का बचाव उस स्थिति में नहीं लिया जा सकता, जब एक व्यक्ति को बचाने की कोशिश में आरोपी दूसरों को अधिक नुकसान पहुंचा दे।

जस्टिस राकेश कैन्थला ने कहा कि धारा 81 का सिद्धांत केवल कम नुकसान पहुंचाकर बड़े नुकसान को रोकने की अनुमति देता है। हालांकि, यदि किसी कार्रवाई से अधिक गंभीर परिणाम सामने आते हैं तो आरोपी इस प्रावधान का लाभ नहीं ले सकता।

अदालत ने कहा,

“यदि आरोपी की यह दलील भी मान ली जाए कि वह साइकिल सवार को बचाने की कोशिश कर रहा था तब भी उसने बस के नीचे दो लोगों को कुचलकर बड़ी क्षति पहुंचाई। ऐसे में उसे धारा 81 का लाभ नहीं दिया जा सकता।”

मामला एक सड़क हादसे से जुड़ा था, जिसमें आरोपी द्वारा चलाई जा रही बस पहले एक साइकिल सवार से टकराई और फिर दूसरी ओर मुड़कर मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी। मोटरसाइकिल पर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई जबकि साइकिल सवार घायल हो गया।

ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया और अपीलीय अदालत ने भी सजा को बरकरार रखा। इसके बाद आरोपी ने हाइकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दाखिल की।

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों के बयान एक-दूसरे की पुष्टि करते हैं और रिकॉर्ड में ऐसा कुछ नहीं है, जिससे लगे कि वे झूठ बोल रहे थे या आरोपी के खिलाफ उनकी कोई निजी दुश्मनी थी।

अदालत ने यह भी कहा कि बचाव पक्ष ने स्वयं यह दलील दी थी कि चालक ने साइकिल सवार को बचाने के लिए बस मोड़ी थी। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि चालक बस चला रहा था और उसने वाहन को सड़क की गलत दिशा में ले गया।

हाईकोर्ट ने घटनास्थल के नक्शे और तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि बस चालक सड़क के दाहिने हिस्से में चला गया, जो यातायात नियमों का उल्लंघन था। इसी लापरवाही के कारण हादसा हुआ।

अदालत ने माना कि मोटरसाइकिल काफी दूर तक घसीटी गई, जिससे बस की तेज रफ्तार और लापरवाही भी साबित होती है।

इन्हीं आधारों पर हाईकोर्ट ने IPC की धारा 279, 337 और 304ए के तहत दोषसिद्धि बरकरार रखी। अदालत ने यह भी कहा कि इस मामले में परिवीक्षा अधिनियम का लाभ नहीं दिया जा सकता, क्योंकि हादसे में दो लोगों की जान गई और एक व्यक्ति घायल हुआ।

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